इतवार नाथ महाराज ने जान को खतरा बताते हुए प्रकाश नाथ महाराज कि संदिग्ध गतिविधि की जांच की मांग की और समस्त नाथ सम्प्रदाय साधु समाज से बहिष्कृत किया।


 ||डूँगरपुर||बड़लिया धूनी के महंत और वागड़ मेवल क्षेत्र में पिछले 45 वर्षों से तप साधनारत और जनता के सिद्ध योगी डॉ इतवार नाथ जी ने बताया कि,

प्रकाश उर्फ प्रकाश नाथ द्वारा उनके नाम और पद तथा दी गई दीक्षा शिक्षा का गलत इस्तेमाल करने ,धर्म अनुष्ठानों के नाम पर धन संग्रह और निजी सुविधाएं जुटाने तथा जनता के करोड़ों रुपयों की बर्बादी व हेर फेर की संभावना , गुरु परंपरा के द्रोह करने तथा धार्मिक आडंबर रचने, लोक देवताओं के प्रति अपमानजनक भाषणबाजी कर साम्प्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने और भावनाओं को आहत करने ,राजनीति में आने के लिए जातीय समीकरण बिगाड़ने, असामाजिक तत्वों से जुड़ाव , धूनी व मठ पर जनता को उकसाने , साधना तप में ध्यान रुचि न होने अपितु तंत्र मंत्र के दुरुपयोग करने, जनता व स्थानीय लोगों में स्वयं को उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री आदित्यनाथ व वसुंधरा जी पूर्व मुख्यमंत्री का खास आदमी होना बता कर प्रभुत्व जमाने का प्रयास करने तथा यहां आगमन के प्रारम्भ से ही साधु होने के झूठ उजागर होने और परिवाद उच्च स्तरीय प्रशासनिक जांच  विषय  में ) पूर्व में बिहार के भगोड़ा अपराधी होने की बात सामने आने के पश्चात महंत श्री श्री इतवार नाथ जी व अखिल भारतीय नाथ सम्प्रदाय भेष 12 व 18 ने जनता व प्रशासन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रकाश नामक युवक को संदिग्ध मानते हुए  नाथ पंथीय गुरु शिष्य परंपरा से पूर्णतः बहिष्कृत कर दिया गया है और इस संबंध में भविष्य में किसी भी स्थिति के लिए महंत जी व नाथ पंथ को जिम्मेदार न माना जाए। इस संबंध में प्रशासन को सूचना दी गई ।



गौर तलब है कि कुछ माह पूर्व  महंत जी का स्वास्थ्य खराब होने पर और उनकी जान को खतरा होने की संभावना , संस्था के आर्थिक मामलात स्पष्ट न होने और आध्यात्मिक पक्ष को दरकिनार कर आडंबर बढ़ाने और   कारण उन्होंने रुद्र्वहिनी संघ नामक संस्था से त्याग पत्र दे दिया था, जिसके बाद प्रकाश नाथ नामक व्यक्ति और उसकी मंडली के लोगों की जानलेवा धमकियों , झूठे लांछन लगाने, बदनाम करने के प्रयासों के चलते महंत जी को सेवक भक्तों के घरों में निवास करने को मजबूर होना पड़ा है।




जहां महंत जी का इलाज अब तक जारी हैं। इलाज के चलते अब उनकी हालत में सुधार होने पर जनता व क्षेत्र की सुरक्षा हेतु यह जरूरी कदम उठाना आवश्यक हो गया है  महंत जी ने बताया कि धौलागिरी नामक स्थान पर आयोजित यज्ञ के लिए करोड़ों रुपये का धन जुटाने, विशाल निजी आश्रम बनाने और सुख सुविधा जुटाने के लिए उनके नाम और पद प्रभाव को भुना कर दुरुपयोग किया गया जिसकी जानकारी उन्हें क्षेत्रीय भक्तों से प्राप्त हुई। जिसमें प्राचीन पद्धतियों , विधानों और मूर्ति विज्ञान व वास्तु  को दरकिनार कर प्रमाण से बहुत बड़ी प्रतिमा का स्थापन करने का प्रयास मात्र आडंबर और प्रसिद्धि के लिए किया गया जिसके अज्ञान के कारण धार्मिक मान्यतानुसार जनता, देश को अशुभता और दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ सकता है।

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इस सम्बंध में प्रशासन को सूचित कर आगाह किया तथा जनता को भी अखबार में दी गई विज्ञप्ति से सूचित व आगाह किया गया है। 




महंत जी ने बताया कि वागड़ और मेवल, मेवाड़ क्षेत्र में वर्षों से सभी समाज मिलजुल कर रहते आये हैं, साधु संतों का कार्य जनता के हित में कार्य करना होता है न कि राजनैतिक स्वार्थ के चलते जनता और चंदे के नाम पर सुविधाएं जुटाना और ग्रामीण जनता को आडंबरों द्वारा प्रभावित करना।माव जी महाराज, भोलानाथ जी, कल्ला जी गातोड़ जी, गोविंद गुरु, काली बाई, महाराणा प्रताप , हाडी रानी और वीर भीलपूंजा जी की पवित्र धरती पर जातीय उन्माद और नक्सलवादी सोच के बीज बोए जा रहे हैं जिस से इस क्षेत्र का सौहार्द्र खतरे में पड़ जायेगा इस हेतु जनता को विष घोलने वाले, धर्म को व्यापार बनाने वाले पाखंडियों से सावधान रहना चाहिए।

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