कोरोना को लेकर चौकाने वाली खबर, बिना जांच के पोजेटीव होते है लोग और एक ही दिन मे पॉजेटीव नेगेटीव होते है लोग

 

डूँगरपुर जिले के राजकिय चिकित्सालय मे एक और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, हरिश पुत्र राम चन्द्र भोई उम्र 27 वर्ष निवासी- भोई वाड़ा वार्ड नंबर 16 डूंगरपुर आरोप लगाकर बताया कि डूंगरपुर जिले की हरिदेव जोशी सामान्य चिकित्सालय मे कोविड सेंटर जाच केन्द्र पर उसने तथा उसके भतीजे वंश उम्र 8 वर्ष ने कोविड-19 सेंपल पर्ची कटवाई थी जिसमें उसके भतिजे का सैंपल लिया गया था जबकि हरिश ने अपना सैंपल किसी कारणवश नहीं दिया था कॉविड सेंटर की लापरवाही कहें या सिस्टम की गड़बड़ी समझ में नहीं आ रहा कि हरीश ने अपना सैंपल नहीं दिया इसके बावजूद भी 18 तारीख की लिस्ट में पॉजिटिव दर्शाया गया है जबकि उसके भतीजे को नेगेटिव दिखाया है जब हरिश ने सेंपल ही नही दिया तो पॉजिटिव कैसे हुआ कितनी बड़ी लापरवाही है इसका जिम्मेदार कौन इस लापरवाही से कितने लोग परेशान हो गए होंगे समझ में नहीं आ रहा है अब हरीश अस्पताल के चक्कर काट रहा है और मामले की जांच करने की मांग कर रहा है ।



अब कोरोना कि जांच पर ही सवाल खडे हो रहे है आखिर कोरोना कि जांच ही नही हुई सेंपल भी नही लिया तो वह व्यक्ति पोजेटीव केसे हुआ? क्या महज खाना पुर्ति ही कि जा रही है या वास्तविक मे कोरोना को रोकने का काम किया जा रहा है। 

कई लोग पहले भी शिकायत कर चुके हैं कि उन्हे किसी भी तरह कि शिकायत या तकलिफ नही होने के बाद भी पॉजेटीव बताया गया है तो संदेह के घेरे मे आ रही है कोरोना कि जांच क्या वास्तव मे कोरोना जेसी कोई बिमारी है या महज कोई सोची समजी वेश्विक शाजिश ?

फिलहाल हरिश भोई जिला कलेक्टर कानाराम के ऑफिस मे इस मामले कि जांच करवाने कि मांग को लेकर पहुचा है । 

ईधर उदयपुर में कोरोना की रिपोर्ट को लेकर चौंकाने वाला मामला सामने आया है। दो घंटे के अंतराल में अलग-अलग सेंटर्स पर कराई गई कोरोना जांच की रिपोर्ट अलग-अलग आने से सवाल तो खड़े ही हुए हैं, साथ ही जांच कराने वाले व्यक्ति के लिए भी परेशानी खड़ी हो गई। हालांकि, एहतियात के तौर पर वह व्यक्ति अब एकांतवास में है।


मामला उदयपुर जिले के सेमारी के चँदोड़ा स्कूल के एक शिक्षक का है। शिक्षक का कहना है कि उनके पिता बीमार हुए थे तो वे उन्हें लेकर जांच कराने आए थे, पिता कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद नियमानुसार उन्होंने अपनी जांच कराई। उन्होंने अपना पहला सैम्पल 16 सितम्बर दोपहर 1 बजे गीतांजलि हॉस्पिटल में दिया, लेकिन उन्होंने 2 जगह से पुष्टि के मद्देनजर उसी दिन 2 घंटे बाद अपना सैम्पल उदयपुर के कृषि मंडी कोरोना जांच सेंटर पर दिया। हैरानी तो तब हुई जब दोनों की रिपोर्ट अलग-अलग आई। गीतांजलि की रिपोर्ट में कोरोना नहीं था और कृषि मंडी केन्द्र पर दिए गए सैम्पल में उन्हें कोरोना पॉजिटिव बताया गया। हालांकि, उन्होंने ज्यादा तनाव नहीं लेते हुए जहां जरूरी था वहां सूचना देते हुए घर पर ही एकांतवास की प्रक्रिया अपना ली। फिलहाल वे घर पर एकांतवास में हैं। उन्होंने बताया कि पिता की तबीयत खराब होने के बाद ही वे एकांतवास में हो गए थे।


मामले में बीसीएमओ सुरेश मंडोवरिया का कहना है कि फिलहाल उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है, लेकिन सेम्पल लेते समय भी मामूली त्रुटि से रिपोर्ट में बदलाव हो सकता है। वे मामले का पता लगाएंगे।


इधर, चिकित्सा महकमे में इस मामले की चर्चा है। ऐसा यदि अन्य सैम्पलों में भी हो रहा होगा तो आशंका है कि जो वास्तव में पॉजिटिव हैं वे नेगेटिव रिपोर्ट लेकर कोरोना प्रसार के माध्यम न बन रहे हों। हालांकि, नेगेटिव वालों को पॉजिटिव बताए जाने पर ज्यादा समस्या नहीं मानी जा सकती क्योंकि उनमें लक्षण नहीं होने से उन्हें घर पर ही एकांतवास में भेजा जा रहा है।


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