कोरोना अपडेट- स्थिति नियंत्रण सिमा से बाहर, लोग बेपरवाह, कोरोना लपक रहा है हर किसी पर..=

 


दिन प्रतिदिन कोरोना पॉजिटिव मरीज की बढ़ती संख्या सागवाड़ा शहर के आम नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गहरी चिंता का विषय बनता दिखाई दे रहा है । कोरोना थमने का नाम नहीं ले रहा है तो लोग भी जमकर कोरोना गाईडलाइन कि धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं तो प्रशासन जानबुझ कर अंजान हो रहा है । अब एसे में कितना सुरक्षित रहा सागवाड़ा शहर हर एक व्यक्ति के लिए प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।

बैंक ऑफ बड़ौदा कहो या स्टेट बैंक आफ इंडिया, बोहरा वाड़ी कहो या सल्लाटवाडा सागवाड़ा शहर का कोई कोना कोरोना से बचा हुआ नजर नहीं आ रहा है । कल अचानक जब स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बाहर एक बोर्ड लगा देखा जिस पर लिखा था इस बैंक के लगभग कर्मचारी पोजेटीव है । फिर बैंक बंद क्यों नहीं किया जा रहा? बैंक में सिर्फ 3 लोगों को जाने की इजाजत दी गई है तो क्या तिन लोगों से कोरोना वायरस परहेज करता है?

 एसे में सागवाड़ा शहर के मध्य स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय में कोरोना जांच केंद्र पर जांच कराने वाले लोगों कि संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है । आज कोरोना जांच केंद्र पर उमड़ी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कर्मचारियों को पुलिस का सहारा लेना पड़ा । तब जाकर भीड को नियंत्रित किया गया । 

कोरोना के बढ़ते मामलों के बिच पंचमी पर सागवाड़ा शहर में कंडो कि राड सहीत महीपाल मैदान सागवाड़ा में एक हजार से भी ज्यादा लोग इकट्ठे हुए । लेकिन प्रशासन ने चुप्पी साध रखी। आखिर एक हजार लोग बिना मास्क के सागवाड़ा शहर में एक साथ इकठ्ठा हो गए तो क्या प्रशासन को भनक तक नहीं लगी? अब एसे में केसे कहा जाए कि सागवाड़ा शहर आने वाले दिनों में कोरोनावायरस पर नियंत्रण कर लेगा । रात को 11 बजे से सुबह 5 बजे तक रात्रिकालीन कर्फ्यू से क्या दिन में इकठ्ठा बिना मास्क कि भीड़ का कोरोना से कोई लेना देना नहीं?

इधर रतनपुर बॉर्डर पर लोग जमकर कांग्रेस सरकार को आड़े हाथ ले रहे हैं । नियम के अनुसार 72 घंटे की कोरोना जांच प्रमाण पत्र दिखाने पर आने जाने कि इजाजत है तो क्या गुजरात से राजस्थान आने वाला व्यक्ति 72 घंटे बाद पोजेटीव नहीं हो सकता?

क्या कह रहे हैं बॉर्डर पर लोग देखिए-

फिर क्यों बॉर्डर पर रोक टोक?

इंसान कि किमत केसे होगी सुरक्षित?

आज स्थिति यह है कि हर तिसरा व्यक्ति कही न कही कोरोनावायरस कि चपेट में हैं और कोई भी व्यक्ति सरकार की गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहा है और न ही प्रशासन गाइड लाइन का पूर्ण रुप से पालन करवाने में सफल हो रही है । अब सक्ख्ति कि जरूरत है ।

वरना इंसान जिंदगी बचाना मुस्किल होता दिखाई दे रहा है ।




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