हो सकता है कुछ दिनों में आपके घर बिजली नहीं आए फिर क्या करेंगे

 


बिजली संकट से गुजर रहा है देश और हम एक दूसरे पर छीटा कशी कर रहे हैं ।

अगले कुछ दिनों में हो सकता है आपके हमारे घर की बिजली गुल हो सकती है क्योंकि देश में बिजली बनाने वाले कोयले की आपूर्ति खत्म हो रही है ।


अब एसा तो है नहीं कि सरकार प्रयास नहीं कर रही है । लेकिन क्या हमारी जिम्मेदारी नहीं बनती है कि हम भी प्रयास करें । बेहतर होगा कि हम छिंटा कशी नहीं कर के बिजली की बचत करें । इससे पहले भी सरकार ने सोलर पावर प्लांट से बिजली उत्पादन करने की कवायद की थी और सोलर पावर प्लांट लगाकर लोगों ने सरकार को बिजली दी है । क्या हम सोलर पावर प्लांट नहीं लगा सकते? हर बात पर सरकार को कोसन से अच्छा है हम सरकार का सहयोग करें । सोलर पावर प्लांट लगवा कर न हम अपनी बिजली की आपूर्ति पुरी करेंगे बल्कि सरकार को बिजली उत्पादन कर बेच भी सकते हैं । तो फिर क्यों बिजली के नाम पर सरकार को कोस रहे हैं? 


इस वक्त अधिकतर लोग सोलर पावर प्लांट लगा कर खुद बिजली के आत्मनिर्भर बने हैं और सरकार को बिजली बेचकर पैसा भी कमा रहे हैं। आपको बता दें कि इस वक्त कोयले की कमी के चलते बिजली कटौती प्रारंभ हो चुकी है । और यह समस्या कांग्रेस या बीजेपी की वजह से नहीं हमारी खुद की वजह से हुई है । क्योंकि धरती का क्षेत्रफल धरती की उत्पत्ति से लगाकर आज तक न तो बढ़ा है न घटा है लेकिन उसके अनुपात में आबादी कितनी बढ़ी यह आप और हम सभी जानते हैं । कोयला धरती से ही उत्पन्न हो रहा है । फिर किसकी गलती निकाले । जब ऑक्सीजन की कमी हो जाती है तब भी हम सरकार को कोसते हैं हम पेड़ क्यों नहीं लगाते है? 

बेहतर यही है कि हम खुद आत्मनिर्भर बने । तभी सफल हों सकते हैं।

देश में कोयले के उत्पादन में कमी से इसका स्टॉक लगभग खत्म होने के कगार पर है. लिहाजा बिजली का उत्पादन करने वाली आधे से अधिक प्लांट्स अलर्ट पर रखे गए हैं।



देश में सिर्फ चार दिनों के कोयले का स्टॉक बचा हुआ है । पिछले कुछ वक्त से कोयले की किल्लत ने सरकार को परेशान कर रखा है । कोयले की कमी की वजह से बिजली सेक्टर पर बड़ी आफत आ सकती है और देश को भारी ऊर्जा संकट से जूझना पड़ सकता है । बिजली मंत्री आर के सिंह ने न्यूज़ चैनल को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि इस महीने के आखिर में देश के पावर स्टेशनों में सिर्फ चार दिन का स्टॉक बचा था । हाल के कुछ वर्षों में ऐसा कोयला संकट नहीं देखा गया था । अगस्त में देश के पावर स्टेशनों में औसतन 13 दिनों के कोयला का स्टॉक था । देश को इस संकट की स्थिति से सामान्य हालत में आने में छह महीने से भी अधिक का वक्त लग सकता है।

कोयले के उत्पादन में भारी कमी

देश में कोयले के उत्पादन में कमी से इसका स्टॉक लगभग खत्म होने के कगार पर है । लिहाजा बिजली का उत्पादन करने वाली आधे से अधिक प्लांट्स अलर्ट पर रखे गए हैं । बिजली मंत्री ने कहा कि उन्हें पता नहीं है कि अगले पांच-छह महीने उन्हें चैन मिलेगा कि नहीं क्योंकि कोयला संकट अभूतपूर्व है । आरके सिंह ने कहा कि पिछले एक सप्ताह से हालात बेहद खराब हैं । देश में 40 से 50 गीगावाट बिजली का उत्पादन करने वाले थर्मल पावर प्लांट्स में सिर्फ तीन दिन के कोयले का स्टॉक बचा हुआ है ।

मंत्रालय और कोल कंपनियों के अधिकारियों की बैठक

देश में कोयले से बिजली उत्पादन क्षमता 203 गीगावाट है । हमारी 70 फीसदी बिजली कोयले से पैदा होती है । अगले कुछ सालों में देश में बिजली की मांग काफी बढ़ने वाली है । कई केंद्रीय मंत्रालय इस वक्त कोल इंडिया और एनटीपीसी के साथ मिलकर कोयला खदानों का उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर विचार कर रहे हैं । फिलहाल कोयला खनन कंपनियां उन्हीं कंपनियों को पहले कोयला देंगी, जिन्होंने बकाये का भुगतान कर दिया है।



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