Dungarpur: दुर्गम क्षेत्रों के लिए वरदान बन सकती है 'म्हारो भायो' बाइक एम्बुलेंस, PHOTOS में देखिये इसकी खासियत

 

डॉ. असावा ने बताया की डूंगरपुर-बांसवाड़ा जनजातीय और पहाड़ी इलाका है. यहां दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में पक्की या चौड़ी सड़कें भी नहीं हैं. ऐसे हालात में हर कहीं बड़ी एम्बुलेंस के लिये पहुंचना मुश्किल भरा होता है. इन तमाम बातों को देखते हुए बाइक एम्बुलेंस को डिजाइन किया है. यह बाइक एम्बुलेंस उन तमाम जगहों पर पहुंच सकती हैं, जहां बड़ी एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती. बड़ी एम्बुलेंस कई बार ट्रैफिक जाम की स्थिति में भी फंस जाती है, लेकिन बाइक एम्बुलेंस इसमें से आसानी से निकाली जा सकती है. डॉ. असावा ने इस बाइक एम्बुलेंस को नाम दिया है 'म्हारो भायो' ।


डॉ. श्रीकांत असावा ने बताया कि इस एम्बुलेंस में एक बाइक के साथ विशिष्ट प्रकार की साइड कार जुड़ी रहेगी. इसमें 6 फीट के इंसान को आसानी से लेटाकर ले जाया जा सकता है. एम्बुलेंस में मरीज के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर, बीपी स्टूडेंट किट, थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर सहित तमाम प्रकार के अन्य चिकित्सा उपकरण भी मौजूद रहेंगे जिसकी जरूरत एक मरीज को होती है ।


खासकर ऐसे गांव, कस्बे और क्षेत्र जहां सही सड़क मार्ग भी नहीं है या संकरी गलियों वाले शहर में बाइक एम्बुलेंस कारगर होगी. इसके के साथ एक आयुष डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ भी रहेगा. वो पीड़ित को तुरंत इलाज उपलब्ध करवाएंगे ।


डॉ. असावा ने बताया कि एम्बुलेंस का मॉडल फरीदाबाद में तैयार कर लिया है. इसकी डिजाइन और उपलब्ध किट के बारे में जिला कलक्टर को भी अवगत करवाया है. कलक्टर ने इस एम्बुलेंस बाइक का प्रस्ताव राज्य सरकार, नेशनल हेल्थ मिशन और ट्राईबल मिनिस्ट्री को भिजवा दिया है. वहां से मंजूरी का इंतजार है ।



एक बड़ी चार पहिया एम्बुलेंस पर बड़ा खर्च आता है. वहीं उसके मेंटेनेंस पर भी भारी खर्च होता है. लेकिन एक बाइक एम्बुलेंस 2 से 3 लाख रुपये में तैयार हो जाएगी. कम कीमत होने के साथ ही इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह कहीं भी आ-जा सकेगी ।


बकौल डॉ. असावा अगर सरकार की ओर इस बाइक एम्बुलेंस के प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इससे जिले में मातृ, शिशु और बाल मृत्यु दर कम होने के साथ ही दुर्घटना और अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को समय पर उपचार करके उनकी जान भी बचाई जा सकेगी. दुर्गम इलाकों के लिये बेहद कारगर सिद्ध हो सकती है ।

अब सोचने वाली बात यह है कि यह एंबुलेंस कितना कारगर साबित होती है क्योंकि यहां पर 108 एंबुलेंस को दूसरी गाड़ियां टक्कर मार देती हैं यहां पर आए दिन बाइक से बाइक टकराती रहती है और सड़कें इतनी दुरुस्त नहीं है कि यहां पर बाइक एंबुलेंस चल पाए लोग आए दिन बड़ी एंबुलेंस को असामाजिक तत्व शराब के नशे में रास्ते में रोककर बाधित कर देते हैं ऐसी स्थिति में यह सुविधा कहां तक कारगर साबित होती है यह समय ही बता पाएगा

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