सागवाड़ा: राजकीय चिकित्सालय की मोर्चरी के पास जिंदा लोग हो जाते हैं बैहोश,एसा क्यों?

 

सागवाड़ा: अस्पताल की मोर्चरी के पास किसी शव के पोस्टमार्टम के दौरान आए परिजन बेहोश हो जाते हैं। कारण जान कर हैरानी होगी।

उप जिला अस्पताल में सफाई व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगाती पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय सागवाड़ा की यह तस्वीरें पोस्टमार्टम कक्ष के आस पास की है जहां गंदगी का आलम इतना है कि स्वस्थ व्यक्ति अगर एक घंटा खड़ा रह जाए तो वह भी बिमार हो जाता है। आए दिन अस्पताल से निकलने वाला बायोमेडिकल वेस्ट अस्पताल के पिछले हिस्से में डाल दिया जाता है। जहां पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी बनाई गई है। यहां आबादी क्षेत्र भी है। बदबू इतनी भयंकर आती है कि लोगों को स्वांस लेना भी मुश्किल होता है।


बायोमेडिकल वेस्ट के अलावा सरकारी अस्पताल से सरकारी अंग्रेजी शराब की खाली बोतलें भी निकली है जो पिछले हिस्से में सरकारी गारबेग में भर कर फैंक दी जाती है। सवाल यह उठता है कि आखिर शराब की बोतल का सरकारी अस्पताल में क्या उपयोग लिया जाता है? आए दिन अस्पताल परिसर में शराब की बोतलें देखी जा सकती है तो आखिर कौन शराब का उपयोग अस्पताल में करता है।


इसके अलावा नगरपालिका सागवाड़ा द्वारा मोर्चरी के पास एक कचरा पात्र भी करवाया गया है जिसको रखने के बाद खाली करने की जिम्मेदारी का कोई अता पता नहीं है। आखिर कौन करेगा कचरा पात्र को खाली? कचरा पात्र से कचरा बाहर की और बिखरता है और गंदगी फैलती है । आखिर कौन है इसका जिम्मेदार?

इनका कहना है - अस्पताल में नगरपालिका द्वारा रखवाए गए कचरा पात्र में कचरा निस्तारण की जिम्मेदारी नगरपालिका की है। और नगरपालिका समय समय पर कचरा निस्तारण करवा रही हैं। अगर एसी समस्या उत्पन्न हुई है तो हम नगरपालिका को अवगत करवाएंगे। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ राजाराम मीणा

इनका कहना है - अस्पताल में कचरा पात्र नगरपालिका द्वारा रखवाए गए हैं लेकिन जब तक कचरा पात्र में अस्पताल के सफाई कर्मी कचरा नहीं डालेंगे नगरपालिका के सफाई कर्मी कचरा निस्तारण करने में सक्षम नहीं होंगे। क्योंकि कचरा पात्र ट्रेक्टर की मदद से कचरा संग्रहण करता है और बिखरा हुआ कचरा निस्तारण करने में नगरपालिका के सफाई कर्मचारी परेशान होते हैं।  नगरपालिका सफाई शाखा - अक्षय सेवक सागवाडा 


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