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इंदौर के होलकर स्टेडियम में 18 जनवरी को भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा वनडे मैच होने वाला है। इसके साथ ही मैच के टिकटों को लेकर सोशल मीडिया पर ठगी का एक संगठित खेल भी शुरू हो गया है। ऑनलाइन टिकट बेचने का झांसा देकर ये ठग क्रिकेट प्रेमियों से 50% राशि एडवांस में मांग रहे हैं और जैसे ही पैसा उनके खाते में पहुंचता है, वे ग्राहक का नंबर ब्लॉक कर गायब हो जाते हैं। इस मामले की तह तक जाने के लिए, भास्कर रिपोर्टर ने खुद ग्राहक बनकर सोशल मीडिया पर टिकट उपलब्ध कराने का दावा करने वाले कई स्कैमर्स से संपर्क किया। एक स्कैमर के साथ तो 50 टिकटों का सौदा 3.50 लाख रुपए में तय हुआ। इस पड़ताल में ठगी का एक ऐसा पैटर्न सामने आया, जो बेहद चौंकाने वाला है। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद, इंदौर क्राइम ब्रांच भी हरकत में आई है और उन्होंने एक एडवाइजरी जारी कर लोगों को ऐसे किसी भी झांसे में न आने की सख्त सलाह दी है। ...जब भास्कर रिपोर्टर बना ग्राहक
मैच के टिकटों की भारी किल्लत के बीच, हमारी टीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, खासकर इंस्टाग्राम पर सक्रिय उन अकाउंट्स की जांच शुरू की, जो आसानी से टिकट उपलब्ध कराने का दावा कर रहे थे। इस दौरान पांच से अधिक अलग-अलग लोगों से बातचीत हुई, जिसमें एडवांस पेमेंट, बड़ी संख्या में टिकटों का लालच और विश्वास जीतने के लिए फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाने जैसे तरीके प्रमुख रूप से सामने आए। फ्रॉड 1: 'भरोसा करना होगा, आप पहले नहीं हैं'
इंस्टाग्राम पर ‘event maneger12’ नाम की एक आईडी से संपर्क करने पर तुरंत एक मोबाइल नंबर दिया गया। ट्रू-कॉलर पर यह नंबर कवीन्द्र सिंह राणा के नाम से दर्ज था। बातचीत शुरू होते ही राणा ने टिकटों की पूरी रेट लिस्ट भेज दी। रिपोर्टर ने साउथ पवेलियन के चार टिकटों की मांग की। इस पर राणा ने बुकिंग की प्रक्रिया बताते हुए कहा, बुकिंग के लिए अपना नाम, टिकटों की संख्या, स्टैंड, ई-मेल आईडी, मोबाइल नंबर और पूरा पता भेजिए। कुल रकम का 50% एडवांस जमा करना होगा, जिसके बाद आपके ई-मेल पर QR कोड वाला टिकट भेज दिया जाएगा। टिकट की हार्ड कॉपी 48 घंटे के भीतर आपके पते पर डिलीवर हो जाएगी। जब रिपोर्टर ने ऑनलाइन फर्जीवाड़े का हवाला देते हुए फेस-टू-फेस डील करने की बात कही और बताया कि वह देवास से इंदौर आकर टिकट ले सकता है, तो राणा ने साफ इनकार कर दिया। उसने एक ऑडियो मैसेज में कहा, "50% पेमेंट तो पहले ही करना होगा। हम फेस-टू-फेस डील नहीं करते। हमारे टिकट बीसीसीआई मेंबर के जरिए सीधे डिलीवर होते हैं।" रिपोर्टर ने जब पैसे देने के बाद टिकट न मिलने या फर्जी टिकट मिलने का खतरा जताया, तो उसने विश्वास दिलाने की कोशिश करते हुए कहा, "ये तो ट्रस्ट की बात है। आप कोई पहले व्यक्ति नहीं हैं, जिन्हें हम टिकट दे रहे हैं। अगर आपको प्रूफ चाहिए, तो मैं दे सकता हूँ।" इसके तुरंत बाद, उसने कुछ टिकटों के स्क्रीनशॉट और तस्वीरें भेजीं। लेकिन जैसे ही रिपोर्टर ने ऑनलाइन पेमेंट करने में आनाकानी की, उसने चैट से सभी तस्वीरें तुरंत डिलीट कर दीं। यह उसका पहला संकेत था कि दाल में कुछ काला है। फ्रॉड 2: आधार कार्ड दिखाकर भरोसा जीतने की कोशिश
दूसरे मामले में, हमारी बातचीत करण कुमार गर्ग नाम के एक व्यक्ति से हुई, जिसकी पोस्ट इंस्टाग्राम पर बाकायदा प्रमोट की जा रही थी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सके। रिपोर्टर ने उससे 13 टिकटों की मांग की। गर्ग ने भी वही रटा-रटाया जवाब दिया, "बुकिंग सिर्फ ऑनलाइन ही होगी।" जब रिपोर्टर ने ठगी की आशंका जताई, तो उसने बड़े आत्मविश्वास से कहा, "वो सब इधर नहीं होता।" विश्वास जीतने के लिए, गर्ग ने टिकटों के कई स्क्रीनशॉट भेजे। रिपोर्टर ने उसे भरोसे में लेने के लिए कहा कि वह भी कुछ टिकट आगे बेचकर मुनाफा कमाना चाहता है, इसलिए वह मिलकर डील करना चाहता है। इस पर गर्ग ने कहा, "आप पहले टिकट ले लीजिए, फिर आप उन्हें आगे बेच लेना, लेकिन बुकिंग का तरीका ऑनलाइन ही रहेगा।" बातचीत को और विश्वसनीय बनाने के लिए उसने अपने आधार कार्ड की फोटो भी भेज दी, जिसमें उसका पता चंडीगढ़ का दर्ज था। हालांकि, जैसे ही रिपोर्टर ने इंदौर आकर मिलने की बात पर जोर दिया, उसने साफ मना कर दिया और कुछ ही मिनटों के भीतर चैट से आधार कार्ड और टिकटों की सभी तस्वीरें डिलीट कर दीं। फ्रॉड 3: 50 टिकटों का सौदा और भेजा बारकोड
तीसरे मामले में, एक अन्य नंबर (9088797001) पर संपर्क किया गया। यहां भी बातचीत का पैटर्न बिल्कुल वैसा ही था। सामने वाले व्यक्ति ने टिकटों की रेट लिस्ट भेजी और 50% एडवांस पेमेंट की शर्त रखी। बुकिंग के नाम पर उसने रिपोर्टर से नाम, मोबाइल नंबर, ई-मेल आईडी और पूरा पता मांगा। भरोसे के लिए यहां भी टिकटों की तस्वीरों और पुरानी चैट्स के स्क्रीनशॉट का सहारा लिया गया। जब रिपोर्टर ने कॉल पर बात करते हुए 50 टिकटों की बड़ी डील की बात रखी, तो सामने वाला व्यक्ति लालच में आ गया और उसने तुरंत अपना QR कोड भेज दिया, ताकि एडवांस पेमेंट प्राप्त की जा सके। उसका दावा था कि वह कितने भी टिकट उपलब्ध करा सकता है। तीनों मामलों में ठगी का एक ही पैटर्न 3 जनवरी को ऐप और वेबसाइट क्रैश हो गई
यह फैसला ही साइबर ठगों के लिए एक सुनहरा अवसर बन गया। 3 जनवरी 2026 की सुबह 5 बजे जैसे ही टिकटों की ऑनलाइन बिक्री शुरू हुई, प्लेटफॉर्म पर भारी ट्रैफिक आ गया। वेबसाइट और ऐप क्रैश हो गए। लाखों यूजर्स को घंटों तक वेटिंग में रखा गया और ज्यादातर लोग पेमेंट पेज तक भी नहीं पहुंच सके। नतीजा यह हुआ कि लगभग 90 प्रतिशत क्रिकेट प्रेमी टिकट बुक करने से वंचित रह गए। कुछ ही मिनटों में ईस्ट और वेस्ट स्टैंड जैसे सस्ते टिकट बिक गए, जबकि प्रीमियम कैटेगरी के टिकट भी 10 मिनट के भीतर "सोल्ड आउट" हो गए। टिकट खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। 30 हजार क्षमता, पर आम लोगों के लिए टिकट क्यों कम?
होलकर क्रिकेट स्टेडियम की कुल दर्शक क्षमता लगभग 30,000 है। लेकिन ये सभी सीटें आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं होतीं। एक बड़ा हिस्सा एमपीसीए के सदस्यों, विभिन्न क्लबों और प्रायोजकों के लिए आरक्षित रहता है। इसके अलावा, बीसीसीआई/बोर्ड कोटा, खिलाड़ियों और प्रशासनिक आरक्षण में भी काफी टिकट चले जाते हैं। एमपीसीए ने अव्यवस्थाओं से झाड़ा पल्ला
इस पूरे मामले पर जब भास्कर ने एमपीसीए के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (सीएओ) रोहित पंडित से बात की, तो उन्होंने ज्यादातर सवालों पर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। रिपोर्टर: ब्लैक मार्केट में टिकट कैसे उपलब्ध हो गए?
सीएओ: इसमें एमपीसीए कुछ नहीं कर सकता। टिकट खरीदने के बाद लोग उन्हें ब्लैक में बेच रहे होंगे। रिपोर्टर: ब्लैक मार्केटिंग करने वालों पर एमपीसीए ने क्या कार्रवाई की?
सीएओ: इस मामले में एमपीसीए कुछ नहीं कर सकता। पुलिस ने एडवाइजरी जारी की है। लोगों को खुद पुलिस में शिकायत करनी चाहिए। रिपोर्टर: टिकट के नाम पर हो रही ठगी की जिम्मेदारी किसकी है?
सीएओ: इसमें भी एमपीसीए की कोई भूमिका नहीं है। क्राइम ब्रांच की कार्रवाई और चेतावनी
इंदौर क्राइम ब्रांच के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के अनुसार, टिकट खरीदने के नाम पर ठगी की कई शिकायतें मिली हैं। इन पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में पता चला है कि आरोपी नकली टिकट दिखाकर लोगों से UPI QR कोड स्कैन करवाते थे और भुगतान मिलते ही पीड़ितों को ब्लॉक कर देते थे। पुलिस के मुताबिक, स्कैमर्स दो मुख्य तरीकों से धोखाधड़ी कर रहे हैं