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    रूसी तेल खरीदने में भारत तीसरे नंबर पर खिसका:दिसंबर में रिलायंस और सरकारी कंपनियों ने 29% कम खरीदा; तुर्किये बना दूसरा बड़ा ग्राहक

    4 days ago

    रूसी फॉसिल फ्यूल खरीदने के मामले में भारत अब दूसरे से तीसरे स्थान पर आ गया है। दिसंबर 2025 में रिलायंस इंडस्ट्रीज और सरकारी रिफाइनरियों के रूसी कच्चे तेल के आयात में कटौती के बाद यह बदलाव आया है। कोयला, कच्चा तेल जैसे प्राकृतिक ईंधन, जो करोड़ों साल पहले जमीन के नीचे दबे पौधों और जानवरों के अवशेषों से बने हैं, उन्हें फॉसिल फ्यूल कहा जाता है। यूरोपीय थिंक टैंक 'सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर' (CREA) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने दिसंबर में रूस से 2.3 बिलियन यूरो (लगभग ₹23,000 करोड़) का हाइड्रोकार्बन आयात किया, जो नवंबर के 3.3 बिलियन यूरो (लगभग ₹34,700 करोड़) के मुकाबले काफी कम है। अब तुर्किये 2.6 बिलियन यूरो (लगभग ₹27,300 करोड़) भारत को पीछे छोड़कर रूस का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। चीन अभी भी 6 बिलियन यूरो (करीब ₹63,100 करोड़) की खरीदारी के साथ पहले नंबर पर बना हुआ है। रिलायंस ने घटाई 50% हिस्सेदारी, सरकारी कंपनियों ने इंपोर्ट कम किया दिसंबर में भारत के आयात में आई गिरावट की सबसे बड़ी वजह रिलायंस इंडस्ट्रीज रही। रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी ने रूस से होने वाले आयात को आधा (50%) कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस की पूरी सप्लाई 'रोसनेफ्ट' से आ रही थी, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से कंपनियों ने आयात को कम करना शुरू कर दिया है। रिलायंस के अलावा सरकारी तेल रिफाइनरियों ने भी दिसंबर में रूसी तेल की खरीद में 15% की कमी की है। दिसंबर में रूसी तेल का आयात 29% गिरा नवंबर में भारत ने रूसी कच्चे तेल पर 2.6 बिलियन यूरो खर्च किए थे, जो दिसंबर में 29% गिरकर 1.8 बिलियन यूरो पर आ गया। CREA ने नोट किया कि यह गिरावट तब आई है जब भारत का कुल तेल आयात थोड़ा बढ़ा है। यानी भारत अब रूस के बजाय दूसरे देशों से तेल खरीद रहा है। रोसनेफ्ट और लुकोइल से दूरी बना रही कंपनियां रूस-यूक्रेन युद्ध के लिए फंड रोकने के मकसद से अमेरिका ने रूस की सबसे बड़ी तेल कंपनियों 'रोसनेफ्ट' और 'लुकोइल' पर प्रतिबंध लगाए हैं। इन पाबंदियों के चलते रिलायंस, HPCL, HPCL-मित्तल एनर्जी और मंगलौर रिफाइनरी (MRPL) ने रूसी तेल की खरीद या तो रोक दी है या काफी कम कर दी है। हालांकि, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) अभी भी उन रूसी संस्थाओं से तेल खरीद रही है जिन पर प्रतिबंध नहीं हैं। भारत के कुल तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 35% से घटकर 25% रही फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद जब पश्चिमी देशों ने रूस से तेल और गैस की खरीद घटा दी थी। तब भारत रूस का सबसे बड़ा ग्राहक बनकर उभरा था। भारत की कुल तेल जरूरत का जो हिस्सा पहले 1% से भी कम था, वह बढ़कर 40% तक पहुंच गया था। लेकिन दिसंबर 2025 में रूस की हिस्सेदारी घटकर 25% रह गई है, जो पिछले महीने 35% थी। भारत अब फिर से अपने पुराने पार्टनर्स यानी मिडिल-ईस्ट के देशों की ओर रुख कर रहा है। भारत में रिफाइन होकर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जा रहा रूसी तेल रिपोर्ट में एक तथ्य यह भी सामने आया कि भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की रिफाइनरियां रूसी कच्चे तेल को प्रोसेस कर पेट्रोल-डीजल बना रही हैं और इसे उन देशों को बेच रही हैं जिन्होंने रूस पर प्रतिबंध लगाए हैं। दिसंबर में इन रिफाइनरियों ने यूरोपीय संघ (EU), अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया को 943 मिलियन यूरो के पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किए। इसमें से अमेरिका को होने वाले निर्यात में 121% की बढ़ोतरी देखी गई, जिसमें जामनगर रिफाइनरी की बड़ी हिस्सेदारी रही। चीन अभी भी नंबर-1, रूस की कुल कमाई का 48% हिस्सा वहीं से रूस के लिए चीन अभी भी सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है। रूस के कुल एक्सपोर्ट रेवेन्यू का 48% हिस्सा चीन से आता है। दिसंबर में चीन ने 6 बिलियन यूरो का रूसी तेल, कोयला और गैस खरीदी। चीन का समुद्री रास्ते से होने वाला तेल आयात भी दिसंबर में 23% बढ़ा है।
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