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    राजस्थान का वाहन चोर बना ड्रग्स किंग:एक लाख का इनामी, गुजरात-महाराष्ट्र-कर्नाटक तक नेटवर्क, पत्नी से कहता था- पुलिस पकड़ नहीं पाएगी

    1 day ago

    राजस्थान के टॉप-10 वांटेड क्रिमिनल में शामिल MD ड्रग्स का मास्टरमाइंड रमेश कुमार विश्नोई 8 साल बाद हत्थे चढ़ा है। 16 जनवरी को एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) उसे कोलकाता से दबोच कर लाई है। बाड़मेर का रहने वाला रमेश उर्फ अनिल उर्फ रामलाल बिश्नोई (31) महज 10वीं पास है। उसने महाराष्ट्र जेल में एक डॉक्टर से खतरनाक ड्रग्स MD बनाने का फॉर्मूला सीखा था। जेल से बाहर आते ही उसी फॉर्मूले से उसने MD ड्रग्स बनाकर बेचना शुरू कर दिया। फिर उसी डॉक्टर के कहने पर राजस्थान में MD बनाने की फैक्ट्रियां लगा दीं। एक लाख का इनामी रमेश भले ही पुलिस की पकड़ से दूर था, लेकिन पत्नी से रोज बात करता था। पत्नी से कहता था- पुलिस कभी पकड़ नहीं पाएगी। तस्करी की डील करने फ्लाइट से आता-जाता था। इसी रूट के कारण पकड़ा गया। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- वाहन चोर से ड्रग्स माफिया बनने और उसके पकड़े जाने की पूरी कहानी... आईजी (ANTF) विकास कुमार ने बताया- रमेश बाड़मेर के धोरीमन्ना के गांव नेडी नाडी का रहने वाला है। उस पर राजस्थान सहित पांच राज्यों में 36 मामले दर्ज हैं। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक की जेलों में बंद रह चुका है। 12वीं में फेल होने के बाद आवारागर्दी करने लगा था। शौक पूरे करने के लिए 17 साल की उम्र में पहली बार बाइक चोरी की। इस मामले में वो बाल सुधार गृह में बंद रहा। बाहर आने के बाद दोबारा से बाइक चुराने लगा। धीरे-धीरे तस्करों के संपर्क में आया और अफीम-डोडा पोस्त और फिर शराब तस्करी करने लगा। तस्करों के लिए ऑन डिमांड चुराता लग्जरी कारें रमेश महज 20-21 साल की उम्र में ही गाड़ियां चुराने का मास्टरमाइंड बन गया था। जोधपुर-बाड़मेर के बड़े शराब तस्करों के लिए ऑन डिमांड बोलेरो-स्कॉर्पियो जैसी कारें चुराने लगा। एक गाड़ी के बदले उसे 50 हजार से 1 लाख रुपए तक मिलते थे। सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि रमेश ने 100 से ज्यादा वाहन चोरी कर शराब तस्करों को बेच डाले। शराब तस्करी में मोटा मुनाफा देख इसी धंधे में कूद गया। इसी दौरान गुजरात और महाराष्ट्र के तस्करों के संपर्क में आया। दोस्त को अमीर होता देख लगाई शर्त, जेल में मिला डॉक्टर पुलिस के अनुसार, शराब तस्करी में उसका पार्टनर दोस्त भजन लाल सिहाग भी था। अवैध धंधे से कमाई को लेकर दोनों में टशन हुआ कि सबसे बड़ा पैसे वाला कौन है? इसको लेकर दोनों के बीच पैसा कमाने की रेस शुरू हो गई थी। इस बीच साल-2017 में महाराष्ट्र पुलिस के हत्थे चढ़ने पर रमेश को जेल हो गई। पुणे की येरवड़ा सेंट्रल जेल में बंद होने के दौरान ड्रग्स मेकर डॉ. बिरजू से उसकी मुलाकात हुई। डॉ. बिरजू ने रमेश को केमिकल और एमडी ड्रग्स का बड़ा सप्लायर बताया। एक ही जेल में साथ रहने के दौरान दोनों में गहरी दोस्ती हो गई। इस दौरान बिरजू ने रमेश को ड्रग्स सप्लाई के लिए तैयार कर लिया। जेल में बनाया गुरु, हर बिजनेस में देता रॉयल्टी जमानत मिलने पर रमेश येरवड़ा सेंट्रल जेल से बाहर आया। शुरुआत में डॉ. बिरजू ने उसे एक-दो लाख रुपए प्रति किलो के हिसाब से MD ड्रग बेचने को दी। उस माल को रमेश ने राजस्थान के कई शहरों में खपाया। नशे की बढ़ती डिमांड देख रमेश ने बड़ा हाथ मारने का प्लान बनाया। इस पर डॉ. बिरजू ने ही उसे राजस्थान में ड्रग फैक्ट्री लगाने का आइडिया दिया। पुलिस के अनुसार, डॉ. बिरजू को कई रसायनों की मदद से एमडी ड्रग्स बनाने का फॉर्मूला पता था। जेल में बैठे बिरजू ने रमेश को MD ड्रग्स बनाने का पूरा फॉर्मूला बता दिया। ड्रग बनाने के लिए जरूरी केमिकल कहां मिलेगा, कितना खर्चा आएगा, इन सबकी जानकारी भी दी। इसके बाद रमेश ने अपने नेटवर्क के जरिए खेतों में लैब तैयार की। उसमें ड्रग्स बनाने के लिए डॉ. बिरजू अपने सूत्रों के जरिए केमिकल भिजवाता रहा। ड्रग्स तैयार होने के बाद रमेश उसे बेचने लगा। माफिया रमेश, डॉ. बिरजू को 'गुरु' बुलाता था। साथ ही तस्करी से कमाई का एक हिस्सा भी उसे बतौर रॉयल्टी देता था। पश्चिमी राजस्थान में डाली दर्जनों फैक्ट्री शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि रमेश कुमार विश्नोई बड़े शातिराना तरीके से ड्रग्स तस्करी को अंजाम देता था। वो जगह बदल-बदल कर अलग-अलग स्थानों पर फैक्ट्री लगाता। हर फैक्ट्री में नए पार्टनर बनाता था। किसी भी पार्टनर को एक-दूसरे की जानकारी नहीं देता था। यह भी नहीं बताता था कि केमिकल कहां से आ रहा है, ड्रग्स सप्लाई करने वाला कौन है? 7 दिन में डॉ. बिरजू के बताए फॉर्मूले से एमडी ड्रग्स तैयार होने पर सबसे पहले पैकेट में बंद कर महाराष्ट्र में अपने सप्लायरों को पहुंचाता। कभी बल्क में माल नहीं भिजवाता था। उसके बाद राजस्थान के तस्करों और हैंडलरों की डिमांड पर महाराष्ट्र से वही माल दोबारा मंगवाता। उसकी सप्लाई चेन की पुलिस को भनक लग गई थी। पुलिस के मुताबिक जोधपुर, बाड़मेर और सिरोही में पिछले दिनों उसकी तीन ड्रग्स फैक्ट्रियों को छापा मारकर पकड़ा था। ड्रग्स की कमाई से मार्बल की खदानें खरीदीं, लग्जरी लाइफ का शौक गिरफ्तार रमेश विश्नोई ने पूछताछ में बताया कि वो 7 दिन में 1 लाख के केमिकल से 9 करोड़ की एमडी तैयार करता था। पिछले ढाई साल से एमडी बनाने का काम कर रहा था। इससे आरोपी ने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की। उस कमाई से गांव में बड़ा मकान बनवाया, गाड़ियां खरीदीं, दो बोरिंग, मार्बल की माइनिंग, मार्बल की कटिंग फैक्ट्री के अलावा कार डेकोर का शोरूम बनवाया। इसके अलावा भी कई प्रॉपर्टी की जांच अभी जारी है। ड्रग्स से होने वाली कमाई के चलते वह लग्जरी लाइफ जीने लगा था। वह कोलकाता में एक लग्जरी फ्लैट में रहता था। काम करने के लिए घर में नौकर लगा रखे थे। जयपुर, जोधपुर, कोलकाता, पुणे या किसी भी शहर में सफर के लिए फ्लाइट से ही आता-जाता था। घूमने के लिए हमेशा क्रेटा कार रेंट पर लेता। फरारी के दौरान की धार्मिक यात्रा आईजी विकास कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी रमेश कुमार विश्नोई पिछले कुछ सालों से भक्ति में लग गया था। उसे लगता था कि उस पर जो पैसों की कृपा हो रही है। भगवान काे उसे आशीर्वाद मिल रहा है। इस कारण वह राजस्थान में एफआईआर दर्ज होने के बाद बाहर निकल गया। उसने फरारी के दौरान 12 ज्योतिर्लिंग, चारों धाम की यात्रा सहित कई कर्मकांड किए। एक बार जयपुर के बरकत नगर में पुलिस टीम ने उसे पकड़ने के लिए दबिश दी थी, तब वह कुंभ से लौटा ही था। हर दिन करता था पत्नी से बात रमेश कभी मोबाइल का उपयोग नहीं करता था। इसके बावजूद अपनी पत्नी से रोज बात करता था। पत्नी कई बार रमेश को बोलती थी की आप बात करते हो, पुलिस पकड़ लेगी, तो रमेश उसे कहता था- वह जिस तकनीक का इस्तेमाल करता है, उसे पुलिस कभी नहीं पकड़ पाएगी। अब जांच टीम उस तकनीक की भी पड़ताल कर रही है। एक तस्कर से मिला इनपुट, हवाई सफर के डेटा से पकड़ा गया जानकारी के अनुसार, पुलिस टीम को गिरफ्तार रमेश बिश्नोई के एक साथी ने ही टिप दी थी। उसने पुलिस को बताया कि रमेश नाम का एक तस्कर है, जो कोलकाता एयरपोर्ट से पुणे के रेगुलर फ्लाइट लेता है। इसके बाद टीम के सदस्यों ने पिछले छह माह का फ्लाइट का रिकॉर्ड निकाला। इससे पता चला कि रमेश महीने में 5 से 7 बार इसी रूट पर फ्लाइट से आना-जाना कर रहा था। पुलिस ने क्रिमिनल रिकॉर्ड खंगाला तो पता चला कि ये कोई आम तस्कर नहीं, बल्कि राजस्थान पुलिस का मोस्टवांटेड एक लाख का इनामी रमेश कुमार बिश्नोई है। इसके बाद जयपुर से कोलकाता के लिए एक टीम भेजी गई। टीम ने 16 जनवरी को उसे धर दबोचा। उम्र-31, मुकदमे 36 से ज्यादा रमेश कुमार के खिलाफ राजस्थान सहित पांच राज्य (गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना और कर्नाटक) में करीब 36 केस दर्ज हैं। वह पांचों जिलों की जेलों में सजा भी काट चुका है। बदमाश के खिलाफ आसाम और मणिपुर में फेक नाम से क्राइम करने और केस दर्ज होने का पता चला है। बाड़मेर के पुलिस स्टेशन में ड्रग्स तस्करी को लेकर रमेश के खिलाफ साल-2018 में केस दर्ज है। उसी के बाद से वह फरार चल रहा था। पिछले 8 साल से नाम-हुलिया छिपाकर ठिकाने बदल-बदल कर फरारी काट रहा था। आईजी विकास कुमार ने बताया कि राजस्थान में दर्जनों एमडी फैक्ट्रियों के सूत्रधार रमेश उर्फ रामलाल उर्फ अनिल को गिरफ्तार करना एजेंसियों के लिए बड़ा टास्क था। ANTF ने न केवल उसे गिरफ्तार किया है, बल्कि कई अन्य माफिया के सुराग मिले हैं। --- ड्रग माफिया के पकड़े जाने की यह खबर भी पढ़िए... ANTF ने कोलकाता से पकड़ा राजस्थान का मोस्टवांटेड बदमाश, एमडी ड्रग्स फैक्ट्रियां डाल बन गया करोड़पति एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) की टीम ने राजस्थान के टॉप-10 वांटेड बदमाश को कोलकाता (पश्चिमी बंगाल) में दबिश देकर पकड़ा है। पिछले 8 साल से फरार बदमाश पर एक लाख रुपए का इनाम रखा गया था...(CLICK कर पढ़ें)
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