SEARCH

    Select News Languages

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    vagadlive
    vagadlive

    ट्रम्प बोले- ईरानी प्रदर्शनकारी सरकारी इमारतों पर कब्जा कर लें:प्रदर्शन जारी रखें, मदद रास्ते में है, हत्यारों के नाम नोट कर लो

    5 days ago

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में प्रदर्शन कर रह लोगों को सरकारी इमारतों पर कब्जा करने की सलाह दी है। उन्होंने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान के देशभक्त प्रदर्शन करते रहें और अपनी संस्थाओं को अपने कब्जे में लें। ट्रम्प ने लोगों से प्रदर्शन जारी रखने अपील की और कहा कि मदद रास्ते में हैं। जो लोग प्रदर्शनकारियों की हत्या और उन पर अत्याचार कर रहे हैं, उनके नाम नोट कर लो। उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ट्रम्प ने यह भी कहा कि उन्होंने ईरान के अधिकारियों के साथ होने वाली सभी बैठकों को रद्द कर दिया है। जब तक प्रदर्शनकारियों की हत्याएं बंद नहीं होतीं, तब तक कोई बातचीत नहीं होगी। दावा- ईरान में अब तक 12 हजार लोगों की हत्या ईरान में 12 हजार प्रदर्शनकारियों की हत्या का दावा किया जा रहा है। ईरान से जुड़े मामलों को कवर करने वाली ब्रिटिश वेबसाइट ईरान इंटरनेशनल ने दावा किया है कि ये हत्याएं पिछले 17 दिनों में हुई हैं। वेबसाइट ने इसे ईरान के आधुनिक इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा हत्याकांड बताया है। वहीं रॉयटर्स न्यूज एजेंसी ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से मरने वालों की संख्या 2000 बताई है। वेबसाइट का कहना है कि यह जानकारी कई सोर्सज पर आधारित है। इस डेटा की कई लेवल पर जांच की गई और सख्त प्रोफेशनल स्टैंडर्ड के मुताबिक पुष्टि के बाद ही इसे जारी किया गया। ज्यादातर मारे गए लोग 30 साल से कम उम्र के थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ज्यादातर हत्याएं 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' और 'बसीज फोर्स' ने गोली मारकर की है और ये सब सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के आदेश पर हुआ। दावा किया गया है कि अधिकतर हत्याएं 8 और 9 जनवरी की रात को हुईं। सरकार इंटरनेट और कम्युनिकेशन को ठप कर अपने अपराध दुनिया से छुपा रही है। वहीं भारत दौरे पर आए जर्मनी के चांसलर फेडरिक मर्त्ज ने मंगलवार को कहा कि ईरान में सरकार का खेल खत्म हो चुका है। ट्रम्प ने ईरान पर मिलिट्री एक्शन का प्लान होल्ड पर डाला था ट्रम्प ने मंगलवार सुबह ईरान के खिलाफ मिलिट्री कार्रवाई का प्लान फिलहाल होल्ड पर रख दिया था। हालांकि अमेरिकी सेना को तैयार रहने के लिए कहा गया था, ताकि आदेश मिलते ही तुरंत एक्शन लिया जा सके। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक ट्रम्प का कहना था कि ईरान के अधिकारी व्हाइट हाउस से बातचीत करना चाहते हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा था कि ईरान की ओर से सार्वजनिक तौर पर जो बातें कही जा रही हैं, वे उन प्राइवेट मैसेजेस से अलग हैं जो अमेरिकी प्रशासन को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति इन मैसेजेस को समझना चाहते हैं, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो वे सैन्य कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएंगे। हालांकि उन्होंने ये नहीं बताया कि ये मैसेज किस तरह के हैं। व्हाइट हाउस ने ईरान से बातचीत की कोशिशों पर भी ज्यादा जानकारी नहीं दी, लेकिन यह बताया कि राष्ट्रपति के विशेष प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ ईरान से संपर्क में अहम भूमिका निभाएंगे। ट्रम्प बोले- ईरान से व्यापार किया तो 25% टैरिफ लगाएंगे वहीं ट्रम्प ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों पर 25% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। ट्रम्प ने सोमवार रात ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर बताया कि यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू होगा। हालांकि व्हाइट हाउस की तरफ से इस टैरिफ को लेकर आधिकारिक दस्तावेज जारी नहीं किया गया है। यह फैसला ऐसे वक्त में लिया गया है जब ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं। दूसरी तरफ ईरान की करेंसी रियाल की वैल्यू अब लगभग जीरो के बराबर पहुंच चुकी है। भारतीय मुद्रा में 1 रियाल की कीमत सिर्फ 0.000079 रुपए रह गई है। ईरान पर अमेरिका पहले ही कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा चुका है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान से व्यापार करने वाले प्रमुख देशों में चीन, संयुक्त अरब अमीरात और भारत शामिल हैं। टैरिफ लागू होने पर इन देशों का अमेरिका के साथ व्यापार पर असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट बोले- ईरान के चाबहार पोर्ट पर टैरिफ लागू करना मुश्किल फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन्स (FIEO) के CEO अजय सहाय ने कहा कि अमेरिका का 25% टैरिफ चाबहार पोर्ट प्रोजेक्ट पर लागू नहीं हो सकता, क्योंकि यह एक इन्वेस्टमेंट प्रोजेक्ट है। उन्होंने कहा कि चाबहार व्यापार की बजाय निवेश पर आधारित है, इसलिए यह नए टैरिफ के दायरे में नहीं आएगा। चाबहार एक इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसका मकसद रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ाना, अफगानिस्तान और सेंट्रल एशिया तक पहुंच और चीन के ग्वादर पोर्ट का मुकाबला करना है। भारत ने 2024 में चाबहार को 10 साल के लिए लीज पर लिया है। इसके तहत भारत यहां 120 मिलियन डॉलर निवेश करेगा और 250 मिलियन डॉलर का क्रेडिट लाइन (सस्ता कर्ज) देगा। भारत पर पहले ही 50% टैरिफ लगा चुका अमेरिका अमेरिका पहले ही भारत पर 50% टैरिफ लग चुका है। इसमें 25% रेसिप्रोकल और 25% रूस से तेल आयात को लेकर टैरिफ शामिल हैं। ईरान से व्यापार को लेकर अगर भारत पर टैरिफ लगाया जाता है तो कुल टैरिफ 75% हो जाएगा। टैरिफ के चलते भारत को अमेरिका में अपना सामान बेचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका असर भारत के निर्यात पर पड़ रहा है। दोनों देशों के बीच टैरिफ विवाद को निपटाने के लिए आज ट्रेड डील पर बातचीत होनी है। भारत चाहता है कि उस पर लगाए गए कुल 50% टैरिफ को घटाकर 15% किया जाए और रूस से कच्चा तेल खरीदने पर जो एक्स्ट्रा 25% पेनल्टी लगाई गई है, उसे पूरी तरह खत्म किया जाए। ट्रम्प के टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला कल ट्रम्प के टैरिफ लगाने के अधिकार को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट कल यानी बुधवार को फैसला सुना सकता है। इसे लेकर ट्रम्प ने चिंता जताई है। ट्रम्प ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि अगर कोर्ट ने उनके टैरिफ लगाने के अधिकार को सीमित किया, तो अमेरिका को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है और पहले वसूले गए टैरिफ को लौटाना लगभग असंभव होगा। उन्होंने लिखा कि इतनी बड़ी रकम चुकाने में सालों लग जाएंगे और यह तय करना भी मुश्किल होगा कि किसे, कब और कितना भुगतान किया जाए। चीन, UAE और भारत ईरान के प्रमुख साझेदार वर्ल्ड बैंक के 2022 के उपलब्ध डेटा के मुताबिक ईरान ने सबसे ज्यादा चीन, UAE और भारत से व्यापार किया। इन देशों को ईरान मुख्य रूप से तेल, पेट्रोकेमिकल्स और औद्योगिक उत्पाद निर्यात करता है। अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान एशिया और खाड़ी देशों के जरिए अपना व्यापार जारी रखे हुए है। 2022 में ईरान का कुल व्यापार करीब 140 अरब डॉलर रहा। इसमें ईरान का निर्यात 80.9 अरब डॉलर और आयात लगभग 58.7 अरब डॉलर रहा। ईरान के निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और प्राकृतिक गैस हैं। इसके अलावा पेट्रोकेमिकल्स, स्टील, तांबा, कृषि उत्पाद और खनिज भी निर्यात किए जाते हैं। ईरान मुख्य रूप से मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, औद्योगिक कच्चा माल और दवाएं आयात करता है। अमेरिकी नागरिकों से तुरंत ईरान छोड़ने की अपील ट्रम्प प्रशासन ने ईरान में रह रहे अमेरिकी नागरिकों से तुरंत देश छोड़ने की अपील की है। वर्चुअल अमेरिकी दूतावास ने सुरक्षा अलर्ट जारी कर कहा है कि अमेरिकी नागरिक ईरान से निकलने की योजना बनाएं और इसमें अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न रहें। ईरान के लिए वर्चुअल US एम्बेसी की ओर से जारी अलर्ट में कहा गया है कि देशभर में प्रदर्शन तेज हो रहे हैं और इनके हिंसक होने की आशंका है। अलर्ट के मुताबिक, गिरफ्तारियां और लोगों के घायल होने की घटनाएं सामने आ सकती हैं। अमेरिका और ईरान के बीच 1980 से राजनयिक संबंध नहीं हैं। इसलिए ईरान में अमेरिका का फिजिकल दूतावास नहीं है। इसके चलते अमेरिका ने वर्चुअल US एम्बेसी बनाई है। ट्रम्प बोले- ईरान रेड लाइन क्रॉस कर रहा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार देर रात कहा है कि ईरान सरकार प्रदर्शनों को रोकने के लिए रेड लाइन पार कर रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ‘कड़े विकल्पों’ पर विचार कर रहा है। पत्रकारों से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा कि ईरान में प्रदर्शनकारियों के साथ जो हो रहा है, उस पर अमेरिका की नजर है। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान रेड लाइन पार कर चुका है, तो उन्होंने कहा, “ऐसा लग रहा है कि वे ऐसा करने लगे हैं।” ट्रम्प ने बताया कि ईरान ने अमेरिका से संपर्क कर बातचीत का प्रस्ताव रखा है। बैठक तय करने को लेकर बातचीत चल रही है। हालांकि, हालात को देखते हुए उन्हें पहले कार्रवाई करनी पड़ सकती है, क्योंकि मौतों की संख्या बढ़ती जा रही है और गिरफ्तारियां जारी हैं। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी प्रदर्शनों के बीच ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर उस पर हमला किया तो वह अमेरिकी सैनिकों और इजराइल को निशाना बनाएगा। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालीबाफ ने रविवार को कहा कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो इलाके में मौजूद सभी अमेरिकी मिलिट्री बेस, शिप्स और इजरायल हमारे टारगेट पर होंगे। यह बयान संसद के लाइव सत्र के दौरान दिया गया, जहां सांसद 'डेथ टु अमेरिका' के नारे लगा रहे थे। कालीबाफ ने ईरान की सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने हालात में मजबूती से काम किया है। प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी कि गिरफ्तार किए गए लोगों से सबसे सख्त तरीके से निपटा जाएगा और उन्हें कड़ी सजा दी जाएगी। ईरान पर 1979 से प्रतिबंध लगा रहा अमेरिका अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंध लगाना 1979 से शुरू किया था। यह वही साल था, जब ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई और तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे के बाद 52 अमेरिकी नागरिकों को बंधक बना लिया गया। इसके बाद से अब तक करीब 45 साल में अमेरिका ने कई प्रतिबंध लगाए। -------------------- ईरान से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… ईरान हिंसा- तेहरान के हॉस्पिटल के सामने लाशों का ढेर:लोग अपने परिवार वालों को तलाश रहे; 15 दिन में 544 लोगों की मौतें ईरान में पिछले 16 दिन से हिंसक विरोध प्रदर्शन जारी है। CNN के मुताबित, ईरान की राजधानी तेहरान में एक हॉस्पिटल के बाहर लोगों की लाशों का ढेर पड़ा हुआ है। इस ढेर में कुछ लोग अपने परिवार वालों के लाशों की तलाश कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
    Click here to Read more
    Prev Article
    लंदन में 14 साल की सिख लड़की का गैंगरेप कराया:पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग ने फ्लैट में बंद किया; 200 सिखों ने घेरा डालकर छुड़ाया
    Next Article
    वर्ल्ड अपडेट्स:ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय छात्रों के लिए वीजा नियम सख्त किए, भारत को हाई रिस्क कैटेगरी में डाला

    Related International Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment