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    वर्ल्ड अपडेट्स:पाकिस्तानी सैन्य अफसर का सड़क छाप बयान, प्रेस ब्रीफिंग में बोला- मजा न कराया तो पैसे वापस

    6 days ago

    पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता और इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (DG ISPR) के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी की एक प्रेस ब्रीफिंग विवादों में आ गई है। ब्रीफिंग के दौरान सैन्य अफसर ने सड़क छाप भाषा का इस्तेमाल किया, जिससे अधिकारी की पेशेवर मर्यादा पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में चौधरी ने भारत और अफगानिस्तान की ओर इशारा करते हुए तंज भरे लहजे में कहा- “मजा न कराया तो पैसे वापस”। अपने बयान में चौधरी ने कहा कि पाकिस्तान को 2026 तक हार्ड स्टेट बनना होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत कभी पाकिस्तान के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करेगा। चौधरी ने आगे कहा कि दुश्मन ऊपर से आए या नीचे से, दाएं से या बाएं से, अकेले आए या साथ मिलकर, हर हाल में निपटा जाएगा। मजा न कराया तो पैसे वापस उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान की राजनीतिक नेतृत्व, सेना और जनता एक ही रुख पर हैं और किसी भी दिशा से आने वाली चुनौती का जवाब दिया जाएगा। बयान यहां सुने... अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें... ग्रीनलैंड मुद्दे पर अमेरिका और डेनमार्क की बैठक अगले हफ्ते, ट्रम्प ने कल इस पर कब्जे की धमकी दी थी अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि वे अगले हफ्ते डेनमार्क सरकार से ग्रीनलैंड के मुद्दे पर मुलाकात करेंगे। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को कंट्रोल में लेने की बात कही है, जिससे तनाव बढ़ गया है। ट्रम्प ने मंगलवार को कहा था कि ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए अमेरिकी सेना का इस्तेमाल भी एक विकल्प है। इस मुद्दे को सुलझाने के लिए डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने बताया कि डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों ने रुबियो से बैठक की मांग की थी। ग्रीनलैंड की विदेश मंत्री विवियन मोट्जफेल्ड्ट ने फेसबुक पर लिखा कि बातचीत का मकसद ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के कड़े बयानों पर चर्चा करना होगा। रासमुसेन ने पत्रकारों से कहा कि हम यह बैठक इसलिए चाहते हैं क्योंकि हमें लगता है कि इस चर्चा का कुछ हिस्सा गलत समझ पर आधारित है। हम अपने अमेरिकी साथियों से मिलकर इन गलतफहमियों को दूर करना चाहते हैं। इससे पहले मंगलवार को, यूरोप के नेताओं ने एक संयुक्त बयान में ट्रम्प को चेतावनी दी कि ग्रीनलैंड और डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता (सीमाओं की सुरक्षा) का सम्मान किया जाना चाहिए। अमेरिकी दबाव के बीच हमास नेता का पाकिस्तान दौरा, लश्कर के प्रोग्राम में चीफ गेस्ट बनकर पहुंचे पाकिस्तान पर अमेरिकी दबाव के बीच हमास नेता की पाकिस्तान में मौजूदगी ने नई चर्चा छेड़ दी है। हाल ही में एक वीडियो सामने आया है जिसमें हमास के वरिष्ठ कमांडर और खालिद मशाल के विशेष प्रतिनिधि नाजी जहीर को पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के गुजरांवाला में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े एक आयोजन में चीफ गेस्ट के रूप में देखा गया है। इस कार्यक्रम में वह लश्कर कमांडर राशिद अली संधु के साथ एक ही मंच पर नजर आता है। हॉल में मौजूद लोग 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगाते हैं। यह आयोजन पाकिस्तान मारकजी मुस्लिम लीग नाम की पार्टी के बैनर तले हुआ था, जिसे लश्कर-ए-तैयबा का समर्थन मिलता है। नाजी जहीर पहली बार पाकिस्तान नहीं गए हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले के बाद से उनकी गतिविधियां यहां काफी बढ़ गई हैं। सितंबर 2025 में मिडिल ईस्ट मीडिया रिसर्च इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, जहीर जैश-ए-मोहम्मद जैसे अन्य आतंकी संगठनों के नेताओं के साथ मंच साझा कर चुके हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई हमास के लड़ाकों को गुप्त रूप से ट्रेनिंग दे रही है, जबकि पश्चिमी देश हमास को अलग-थलग करने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच, अमेरिका शांति सुरक्षा के लिए पाकिस्तान पर सैनिक भेजने का दबाव बना रहा है। हालांकि, पाकिस्तान ने अब तक सैनिक भेजने को लेकर सहमति नहीं दी है। ऑस्ट्रेलियाई सांसद ने केरल के फर्जी डिग्री रैकेट का मुद्दा उठाया, कहा- कई विदेशी छात्रों के पास खरीदी हुई डिग्री केरल में हाल ही में एक बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा हुआ है, जिसका असर अब भारत से बाहर ऑस्ट्रेलिया की राजनीति तक पहुंच गया है। इस मामले को लेकर ऑस्ट्रेलिया के एक सांसद ने अपनी ही सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केरल पुलिस ने पिछले महीने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया जो देशभर में नकली यूनिवर्सिटी की डिग्रियां बनाकर बेच रहा था। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह कई सालों से सक्रिय था और अब तक लाखों लोगों को फर्जी सर्टिफिकेट दे चुका हो सकता है। इस मामले में अब तक 11 लोगों को अलग-अलग राज्यों से गिरफ्तार किया गया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस रैकेट का मुख्य आरोपी धनीश उर्फ डैनी है, जो पहले भी इसी तरह के अपराध में जेल जा चुका है। जेल से बाहर आने के बाद उसने यह धंधा और बड़े पैमाने पर फिर से शुरू किया। तमिलनाडु के पोल्लाची इलाके में चोरी-छिपे नकली डिग्रियां छापी जाती थीं। इन डिग्रियों पर असली यूनिवर्सिटी जैसे साइन, मुहर और होलोग्राम लगे होते थे, जिससे वे बिल्कुल असली लगती थीं। ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड राज्य से सांसद मैल्कम रॉबर्ट्स ने दावा किया है कि भारत में पकड़ी गई इन फर्जी डिग्रियों का इस्तेमाल ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में नौकरी और पढ़ाई के लिए किया गया है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलिया में हजारों विदेशी छात्र ऐसे हैं जिनके पास खरीदी हुई या फर्जी डिग्रियां हैं। मैल्कम रॉबर्ट्स ने अपनी सरकार पर आरोप लगाया है कि वह इस गंभीर मुद्दे पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। उनका कहना है कि अगर कोई छात्र फर्जी डिग्री के सहारे ऑस्ट्रेलिया में पढ़ रहा है या काम कर रहा है, तो यह वीजा नियमों का साफ उल्लंघन है और ऐसे लोगों को देश से बाहर किया जाना चाहिए। रॉबर्ट्स पहले भी भारतीय शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। वे ऑस्ट्रेलिया में अप्रवासन के खिलाफ सख्त रुख के लिए जाने जाते हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनका जन्म भारत में ही हुआ था, लेकिन इसके बावजूद वे भारत से जुड़ी डिग्रियों और छात्रों को लेकर अक्सर विवादित बयान देते रहे हैं। पीएम मोदी ने इजराइली पीएम से फोन पर बात की, नए साल की बधाई दी पीएम मोदी ने आज इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने नेतन्याहू और इजराइल के लोगों को नए साल की शुभकामनाएं दीं। बातचीत में दोनों नेताओं ने भारत और इजराइल के बीच रणनीतिक साझेदारी को आने वाले साल में और मजबूत करने पर चर्चा की। इसके साथ ही दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय हालात पर भी बात की। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इजराइल आतंकवाद के खिलाफ मिलकर और ज्यादा मजबूती से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ साझा संकल्प को दोहराया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बातचीत की जानकारी सोशल मीडिया X पर दी। अजरबैजान ने गाजा में सैनिक भेजने से इनकार किया, राष्ट्रपति बोले- कोई दुश्मनी मोल नहीं लूंगा अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने सोमवार देर रात कहा कि उनका देश अपनी सीमाओं के बाहर किसी भी शांति अभियान में हिस्सा नहीं लेगा। अजरबैजान गाजा सहित अपनी सीमाओं के बाहर शांति अभियानों के लिए अपने सैनिक नहीं भेजेगा। अजरबैजान ने अमेरिकी प्रशासन से गाजा में शांति सेना को लेकर बातचीत की थी। इसके लिए 20 से ज्यादा सवाल अमेरिका को भेजा था। उन्होंने कहा, "हमने 20 से अधिक सवालों की एक लिस्ट तैयार की और उसे अमेरिकी पक्ष को सौंप दिया। शांति रक्षा बलों में किसी भी प्रकार की भागीदारी की कोई संभावना नहीं है,"। राष्ट्रपति बोले- मैं अजरबैजान के बाहर किसी भी तरह की दुश्मनी मोल लेने पर बिल्कुल भी विचार नहीं कर रहा हूं। पिछले नवंबर में अजरबैजान सरकार ने कहा था कि जब तक इजराइल और हमास के बीच लड़ाई पूरी तरह से बंद नहीं हो जाती, तब तक अजरबैजान इस तरह के अभियान के लिए कोई सैनिक नहीं भेजेगा। यह अभियान गाजा में प्रस्तावित इंटरनेशनल स्टेबिलाइजेशन फोर्स (ISF) का हिस्सा है। यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की शांति योजना का पार्ट है। यह फोर्स मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल देशों (जैसे अजरबैजान, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र आदि) से सैनिकों की मदद से गाजा में युद्धविराम के बाद स्थिरता बनाए रखने, सुरक्षा सुनिश्चित करने, सहायता पहुंचाने और क्षेत्र को डिमिलिटराइज करने के लिए तैनात किया जाना था। ट्रम्प प्रशासन ने इसे गाजा में शांति प्रक्रिया का अहम हिस्सा बताया था, लेकिन अब तक किसी देश ने इसमें भाग लेने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यह योजना ट्रम्प की गाजा शांति योजना ( 20-पॉइंट प्लान) से जुड़ी हुई है, जो युद्ध खत्म करने और पुनर्निर्माण पर केंद्रित थी। इजराइल के विदेश मंत्री सोमालीलैंड पहुंचे, मान्यता देने के बाद पहला दौरा इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार सोमालीलैंड के दौरे पर पहुंचे हैं। इजराइल ने पिछले महीने सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी थी। इसे दोनों पक्षों के लिए अहम और ऐतिहासिक माना जा रहा है। दौरे के दौरान गिदोन सार ने सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि इजराइल सोमालीलैंड के साथ रिश्तों को तेजी से आगे बढ़ाना चाहता है। राष्ट्रपति अब्दुल्लाही ने इस दौरे को “बड़ा दिन” बताया। पिछले महीने इजराइल दुनिया का पहला देश बना, जिसने सोमालीलैंड को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। सोमालीलैंड ने 1991 में सोमालिया से अलग होकर खुद को स्वतंत्र घोषित किया था, लेकिन अब तक उसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली थी। इस दौरे और मान्यता पर सोमालिया ने आपत्ति जताई है। उसने इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल बताया है। इजराइल ने साफ किया कि यह फैसला किसी देश के खिलाफ नहीं है। इजराइल और सोमालीलैंड के बीच कृषि, स्वास्थ्य, तकनीक और आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर बातचीत हुई है। इजराइल सोमालीलैंड में दूतावास खोलने पर भी विचार कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस कदम को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। फिलीपींस में 6.7 तीव्रता का भूकंप, सुनामी का अलर्ट नहीं फिलीपींस में बुधवार सुबह 6.7 तीव्रता का तेज भूकंप आया। अमेरिका के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक भूकंप का केंद्र सैंटियागो के पास दर्ज किया गया। USGS ने एक अलग आकलन में भूकंप की तीव्रता 6.4 भी बताई है, जिसका केंद्र शहर से करीब 27 किलोमीटर पूर्व में था। भूकंप के बाद प्रशासन ने साफ किया कि फिलहाल किसी तरह का सुनामी अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि भूकंप भले ही शक्तिशाली था, लेकिन इससे समुद्र में खतरनाक लहरें उठने की आशंका नहीं है। गौरतलब है कि फिलीपींस प्रशांत महासागर के ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की वजह से अक्सर भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। यहां तेज भूकंप आना आम बात है। कोलंबिया के राष्ट्रपति की ट्रम्प को धमकी:कहा- हिम्मत है तो मुझे पकड़कर दिखाओ; कभी वेनेजुएला के राष्ट्रपति ने भी ऐसी धमकी दी थी वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद वॉशिंगटन और लैटिन अमेरिका के देशों के रिश्तों में भारी तनाव पैदा हो गया है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो खुलकर अमेरिका के खिलाफ आ गए हैं। पेट्रो ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को सीधी चुनौती देते हुए कहा है कि अगर हिम्मत है तो उन्हें गिरफ्तार करके दिखाएं। उन्होंने कहा कि वह कोलंबिया में ही मौजूद हैं और अमेरिका का इंतजार कर रहे हैं। पेट्रो के इस बयान ने पूरे लैटिन अमेरिका में सियासी हलचल तेज कर दी है। उन्होंने यह बयान वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करने के बाद दिया। गौरतलब है कि मादुरो भी अगस्त 2025 में डोनाल्ड ट्रम्प को इसी तरह की चुनौती दे चुके हैं। मादुरो ने कहा था कि अगर हिम्मत है तो अमेरिका आकर उन्हें गिरफ्तार करे। इसके जवाब में अमेरिका ने मादुरो की गिरफ्तारी पर घोषित इनाम की राशि और बढ़ा दी थी। पूरी खबर यहां पढ़ें...
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