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    भारत के सत्य साईं वेनेजुएला में घर-घर मशहूर कैसे हुए:राष्ट्रपति मादुरो भी भक्त थे, बाबा के निधन पर देश में राजकीय शोक था

    5 days ago

    पिछले हफ्ते वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को न्यूयॉर्क की एक अदालत में पेश किया गया तो उन्होंने कई बार भगवान का नाम लिया। मादुरो ने कहा, “मैं भगवान का आदमी हूं। मैं आजाद हो जाऊंगा” मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत में दिखे इस व्यवहार के पीछे मादुरो की आध्यात्मिक आस्था है, जो रोमन कैथोलिक चर्च से नहीं, बल्कि भारत के एक ऐसे गुरु से जुड़ी है जिन्हें करोड़ों लोग ‘चमत्कारों का पुरुष’ मानते हैं। मादुरो का जन्म एक कैथोलिक परिवार में हुआ था और वेनेजुएला भी कैथोलिक बहुल देश है। इसके बावजूद मादुरो उन प्रमुख वेनेजुएलाई नेताओं में शामिल थे, जिन्हें दिवंगत भारतीय गुरु श्री सत्य साईं बाबा का भक्त बताया जाता है। मादुरो ही नहीं बल्कि उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस, वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज समेत कई हाई प्रोफाइल लोग सत्य साईं बाबा के भक्त हैं। यही वजह है कि भारत से 15 हजार किमी दूर वेनेजुएला में सत्य साईं बाबा मशहूर हैं। मादुरो की पत्नी भी साईं बाबा की भक्त मादुरो को सत्य साईं बाबा से जोड़ने में सबसे बड़ा रोल उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस का माना जाता है। सिलिया फ्लोरेस खुद एक वकील और नेता हैं और नेशनल असेंबली की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। वे मादुरो से शादी से पहले ही सत्य साईं बाबा की भक्त थीं। उन्हीं के जरिए मादुरो पहली बार बाबा के संपर्क में आए और धीरे-धीरे उनकी आस्था भी गहरी होती चली गई। साल 2005 में, जब सिलिया फ्लोरेस पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो चावेज के लिए वकील के तौर पर काम कर रही थीं और मादुरो संसद के स्पीकर थे, तब दोनों भारत आए थे। इस यात्रा में वे आंध्र प्रदेश स्थित प्रशांति निलयम आश्रम पहुंचे, जहां उन्होंने सत्य साईं बाबा से मुलाकात की। उस समय की तस्वीरों में मादुरो और फ्लोरेस बाबा के सामने जमीन पर बैठे हुए दिखाई देते हैं। 2024 में वेनेजुएला की वर्तमान अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज भारत दौरे पर आईं थी, तब उन्हें सत्य साईं आश्रम में दर्शन किए थे सत्य साईं बाबा के निधन पर वेनेजुएला में मना राष्ट्रीय शोक मादुरो के करीबी बताते हैं कि सत्य साईं बाबा की एक बड़ी तस्वीर उनके ऑफिस में भी लगी थी। 2011 में जब सत्य साईं बाबा की मृत्यु हुई थी, तब वेनेजुएला ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। हालांकि तब मादुरो वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो नहीं थे, लेकिन वे विदेश मंत्री थे और सत्ता के बेहद करीब थे। इसके बावजूद वेनेजुएला सरकार ने उनके निधन को सिर्फ एक धार्मिक घटना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय महत्व की घटना की तरह लिया। वेनेजुएला सरकार ने आधिकारिक शोक प्रस्ताव जारी किया। सरकारी तौर पर राष्ट्रीय शोक दिवस घोषित किया गया। सरकारी संस्थानों और नेताओं की ओर से साईं बाबा के लिए औपचारिक संवेदना संदेश दिए गए। यह कदम इसलिए भी चौंकाने वाला था क्योंकि सत्य साईं बाबा वेनेजुएला के नागरिक नहीं थे, वेनेजुएला में कभी स्थायी रूप से नहीं रहे, फिर भी सरकार ने उन्हें इतना सम्मान दिया। वेनेजुएला की महिला ने सपने में सत्य साईं बाबा को देखा था धार्मिक खबरों से जुड़ी वेबसाइट 'रिलिजन न्यूज सर्विस (RNS)' के मुताबिक वेनेजुएला में सत्य साईं बाबा संगठन की शुरुआत किसी बड़े मिशन या प्रचार से नहीं हुई। इसकी शुरुआत एक महिला के व्यक्तिगत आध्यात्मिक अनुभव से हुई। इस महिला का नाम था एना एलेना डियाज-वियाना, जिन्हें वेनेजुएला की पहली साईं भक्त माना जाता है। NS के मुताबिक जब डियाज-वियाना करीब 25 साल की थीं, तब उन्होंने एक अजीब सपना देखा। सपने में उन्होंने एक इंसान को सफेद कपड़ों में देखा, जिनके घुंघराले बाल और बड़ा अफ्रो जैसा हेयर-स्टाइल था। उस समय वह उस इंसान को पहचान नहीं सकीं, लेकिन वह सपना उनके मन में बस गया। सपने के बाद कई सालों तक वह उस चेहरे के बारे में सोचती रहीं। उन्होंने किसी गुरु की तलाश नहीं की थी, लेकिन उनके मन में आध्यात्मिक सवाल, सेवा भावना और दूसरों की मदद करने की इच्छा बढ़ती चली गई। करीब पांच साल बाद, उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री 'द लॉस्ट इयर्स ऑफ जीसस' देखी। इसमें जब उन्होंने सत्य साईं बाबा को देखा, तो वह चौंक गईं। उनके मुताबिक, वही चेहरा था जो उन्होंने सपने में देखा था। तब उन्हें लगा कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक संकेत है। डियाज-वियाना ने अपने घर पर भजन और ध्यान प्रोग्राम शुरू किया इसके बाद डियाज-वियाना ने सत्य साईं बाबा की शिक्षाओं को पढ़ना शुरू किया। बाबा के संदेश 'सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो' और 'हमेशा मदद करो, कभी किसी को दुख मत दो' ने उन्हें बहुत प्रभावित किया। उन्होंने इसे धर्म बदलने के रूप में नहीं, बल्कि मानवता और सेवा के तौर पर अपनाया। उन्होंने कराकस में अपने घर पर छोटे-छोटे भजन, ध्यान और सेवा कार्यक्रम शुरू किए। यहां कोई दिखावटी पूजा नहीं होती थी। मुख्य मकसद प्रार्थना करना और जरूरतमंदों की मदद करना था। धीरे-धीरे डॉक्टर, शिक्षक और पढ़े-लिखे लोग उनके साथ जुड़ने लगे। वेनेजुएला में 1974 में पहला साईं समूह बना डियाज-वियाना की कोशिशों से 1974 में काराकस में पहला साईं समूह बना। इसे पूरी तरह लोकल लोगों चलाते थे और इसकी सारी एक्टिविटी स्पेनिश भाषा में होती थीं। यहीं से वेनेजुएला में साईं बाबा का संदेश फैलना शुरू हुआ। डियाज-वियाना 1988 में वेनेजुएला के 64 लोगों के साथ भारत गईं। वहां उन्होंने प्रशांति निलयम आश्रम में सत्य साईं बाबा से मुलाकात की। इस यात्रा के बाद वेनेजुएला में साईं संगठन को औपचारिक मान्यता मिली और डियाज-वियाना को पहले आधिकारिक साईं सेंटर की अध्यक्ष बनाया गया। डियाज-वियाना का यह व्यक्तिगत अनुभव ही वेनेजुएला में साईं आंदोलन की नींव बना। बाद में यही आंदोलन पूरे देश में फैल गया और कई दशकों बाद इसका असर देश की टॉप पॉलिटिकल नजर आने लगा। फिलहाल साईं बाबा संगठन लैटिन अमेरिका के 22 देशों में मौजूद है। रिपोर्टों के मुताबिक, वेनेजुएला में उनके सबसे अधिक अनुयायी थे, जहां 30 से ज्यादा साईं सेंटर एक्टिव हैं। कौन थे सत्य साईं बाबा सत्य साईं बाबा का जन्म 1926 हुआ था। उन्होंने खुद को शिरडी साईं बाबा का अवतार बताया था। 'लव ऑल, सर्व ऑल' और 'हेल्प एवर, हर्ट नेवर' जैसे संदेशों के लिए प्रसिद्ध साईं बाबा के दुनियाभर में करोड़ों अनुयायी हैं। उनके संगठन 120 से ज्यादा देशों में अस्पताल, स्कूल और जल परियोजनाएं चलाते हैं।
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