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    रिजल्ट देखकर लगा पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई:दौसा जिला टॉपर नंदिनी की मां बोलीं- स्कूल को इग्नोर नहीं करें; लक्ष्य तय कर हासिल की सफलता

    20 hours ago

    माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा घोषित 10वीं क्लास के रिजल्ट में दौसा जिले की होनहार छात्रा नंदिनी विजय ने 99.17 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मेहनत और लक्ष्य के प्रति समर्पण से एक मिसाल कायम की है। नंदिनी का कहना है कि यदि स्पष्ट लक्ष्य तय करके पढ़ाई की जाए तो किसी भी टारगेट को हासिल किया जा सकता है। नंदिनी ने बताया कि वह केवल जरूरी काम होने पर ही मोबाइल का उपयोग करती थी, हालांकि खाली समय में टीवी सीरियल भी देखती थी। पढ़ाई के साथ-साथ उसे बैडमिंटन खेलना भी पसंद है, जिससे वह खुद को मानसिक रूप से फ्रेश रखती थी। मां स्कूल टीचर, पिता प्राइवेट कंपनी में मैनेजर उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार, खासकर मां चेतना विजय को दिया, जो ठीकरिया के संस्कृत स्कूल में अध्यापक हैं। नंदिनी तीन बहनों में से एक है और परिवार का पूरा सपोर्ट उसे लगातार मिलता रहा। नंदिनी के पिता एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर हैं। वहीं मां चेतना विजय ने बेटी की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि जब रिजल्ट देखा तो एक पल के लिए यकीन नहीं हुआ, लेकिन यह बहुत बड़ा अचीवमेंट है। उन्होंने बताया कि नंदिनी ने 100% रिजल्ट का लक्ष्य तय किया था, जिसे वह दीवार पर लिखकर रोज पढ़ाई करती थी। हालांकि कुछ नंबर कम रह गए, लेकिन फिर भी नंदिनी ने शानदार प्रदर्शन किया और परिवार का नाम रोशन किया। नंदिनी का सपना आईएएस अधिकारी बनकर देश सेवा करना है। स्टूडेंट्स को दिया संदेश नंदिनी और उनकी मां ने अन्य विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने माता-पिता के सपनों को पूरा करें। स्कूल की पढ़ाई को कभी नजरअंदाज न करें, क्योंकि वही ज्ञान सबसे ज्यादा स्थायी होता है। कोचिंग और ट्यूशन से ज्यादा ध्यान स्कूल पर देना चाहिए। लक्षिता खंडेलवाल ने 98% अंक हासिल किए दौसा की होनहार छात्रा लक्षिता खंडेलवाल ने 98% अंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि मेहनत, अनुशासन और निरंतरता से हर लक्ष्य को पाया जा सकता है। उनकी यह सफलता सिर्फ एक रिजल्ट नहीं, बल्कि अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा है। लक्षिता बताती हैं कि उन्होंने स्कूल समय के अलावा रोजाना 5–6 घंटे नियमित पढ़ाई की। उनका मानना है कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र “कंसिस्टेंसी” यानी लगातार मेहनत करना है। बिना रुके, बिना हार माने रोज थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ना ही उन्हें इस मुकाम तक लेकर आया। लक्षिता ने अपना अगला लक्ष्य तय कर लिया है-वह आगे चलकर UPSC की तैयारी करेंगी और देश सेवा में अपना योगदान देना चाहती हैं। इतनी कम उम्र में इतना बड़ा लक्ष्य तय करना उनकी सोच और आत्मविश्वास को दर्शाता है।
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