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    जोमैटो को ₹3.7 करोड़ का GST नोटिस:पश्चिम बंगाल टैक्स विभाग ने ब्याज और पेनल्टी के साथ भेजा ऑर्डर; कोर्ट जाने की तैयारी में कंपनी

    1 week ago

    फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म जोमैटो और क्विक कॉमर्स सर्विस ब्लिंकिट की पेरेंट कंपनी इटरनल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। पश्चिम बंगाल के गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) विभाग ने कंपनी को ₹3.7 करोड़ का डिमांड ऑर्डर भेजा है। यह मामला वित्त वर्ष 2019-20 के दौरान टैक्स भुगतान में हुई कमी से जुड़ा है। कंपनी ने मंगलवार शाम को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में इस नोटिस की पुष्टि की है। आउटपुट टैक्स के भुगतान में कमी का मामला एडिशनल कमिश्नर ऑफ स्टेट टैक्स, पश्चिम बंगाल ने यह आदेश पारित किया है। इटरनल ने रेगुलेटरी फाइलिंग में बताया कि यह डिमांड ऑर्डर मुख्य रूप से 'शॉर्ट पेमेंट ऑफ आउटपुट टैक्स' से जुड़ा है। यानी विभाग का मानना है कि कंपनी ने उस अवधि के दौरान जितना टैक्स जमा करना चाहिए था, उससे कम भुगतान किया है। अब विभाग ने बकाया टैक्स के साथ-साथ उस पर भारी ब्याज और जुर्माना भी लगाया है। टैक्स, ब्याज और पेनल्टी का कैलकुलेशन इटरनल को मिले कुल करीब ₹3.7 करोड़ के नोटिस में तीन हिस्से शामिल हैं... नोटिस के आंकड़ों को देखें तो मूल टैक्स से लगभग मिलता-जुलता हिस्सा ब्याज का है, जो कंपनी के लिए एक बड़ी वित्तीय देनदारी बन गया है। अप्रैल 2019 से मार्च 2020 के बीच की गड़बड़ी यह पूरा मामला 5 साल पुराना है। पश्चिम बंगाल टैक्स विभाग ने वित्त वर्ष 2019-20 के रिकॉर्ड्स की जांच के बाद यह आदेश जारी किया है। इटरनल ने बताया कि उन्हें यह आदेश 6 जनवरी 2026 को प्राप्त हुआ है। उस समय जोमैटो और उसकी सहयोगी कंपनियों के कामकाज के दौरान टैक्स कैलकुलेशन में विभाग को गड़बड़ी मिली थीं। कंपनी ने कहा- कोर्ट में अपील करेंगे इस मामले पर कंपनी का कहना है कि वे विभाग के इस फैसले से सहमत नहीं हैं। इटरनल ने अपने बयान में कहा, "हमारा मानना है कि मेरिट के आधार पर हमारा पक्ष काफी मजबूत है। हम इस आदेश के खिलाफ उचित अथॉरिटी के सामने अपील दायर करने की प्रक्रिया में हैं।" कंपनी को उम्मीद है कि उच्च अधिकारियों के पास अपनी बात रखने पर उन्हें इस डिमांड से राहत मिल सकती है। इन्वेस्टर्स और बाजार पर क्या असर होगा इटरनल के तहत आने वाली जोमैटो एक लिस्टेड कंपनी है। ऐसे में GST नोटिस जैसी खबरें निवेशकों के सेंटीमेंट को प्रभावित करती हैं। हालांकि, ₹3.7 करोड़ की राशि कंपनी के कुल टर्नओवर के मुकाबले बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन टैक्स अनुपालन (कंप्लायंस) से जुड़ी चुनौतियां अक्सर ब्रांड इमेज और शेयर की कीमतों पर दबाव डालती हैं। क्या होता है आउटपुट टैक्स और डिमांड ऑर्डर? जब कोई कंपनी अपनी सर्विस (जैसे डिलीवरी) बेचती है, तो वह ग्राहक से जो GST वसूलती है, उसे 'आउटपुट टैक्स' कहते हैं। इसमें से कंपनी अपनी खरीदी गई चीजों पर दिए गए टैक्स (इनपुट टैक्स क्रेडिट) को घटाकर बाकी रकम सरकार को जमा करती है। अगर सरकार को लगता है कि कंपनी ने कैलकुलेशन में गलती की है या टैक्स कम भरा है, तो वह 'डिमांड ऑर्डर' जारी करती है।
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