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    मेटावर्स को ‘भविष्य’ बता रहे थे जुकरबर्ग, अब ‘अतीत’:अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी लोगों से दूर रही वर्चुअल दुनिया; 7.5 लाख करोड़ रु. गंवाए

    13 hours ago

    फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने 2021 में जब कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ किया था, तब उन्होंने एक ऐसी आभासी दुनिया (मेटावर्स- वर्चुअल रियलिटी) का सपना दिखाया था, जहां लोग अवतार बनकर रहेंगे, काम करेंगे और खेलेंगे। आज वह विजन खत्म होने की कगार पर है। मेटा ने हाल ही में ‘मेटावर्स’ पर काम कर रहे 10 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी कर दी। कंपनी ने घोषणा की है कि 15 जून से लोग वीआर हेडसेट (आंखों पर पहनने वाला इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस) के जरिए होराइजन वर्ल्ड्स जैसे इमर्सिव प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर पाएंगे। जिस प्रोजेक्ट पर कंपनी ने करीब 80 बिलियन डॉलर (लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपए) गंवाए, वह अब सिमट रहा है। जुकरबर्ग की यह महत्वाकांक्षी योजना टेक दुनिया की सबसे महंगी विफलताओं में से एक मानी जा रही है, क्योंकि अब कंपनी का पूरा ध्यान एआई पर टिक गया है। जुकरबर्ग ने 2014 में कंपनी ‘ऑक्युलस’ को करीब 16,600 करोड़ रुपए में खरीदकर इस सफर की शुरुआत की थी। उन्हें भरोसा था कि वर्चुअल रियलिटी स्मार्टफोन की जगह ले लेगी। इसके लिए उन्होंने गेमिंग स्टूडियो खरीदे और डेवलपर्स पर करोड़ों लुटाए। कोविड लॉकडाउन के वक्त ये आइडिया क्रांतिकारी लगा, लेकिन बाद में वास्तविकता इससे अलग रही। मेटावर्स के शुरुआती वर्जन तकनीकी खामियों से भरे थे, जिसका सोशल मीडिया पर काफी मजाक उड़ा। करीब 7.4 लाख करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी आम जनता ने इसे पूरी तरह नकार दिया। एपल के महंगे हेडसेट और बाजार की बेरुखी ने बिगाड़ा मेटा का खेल मेटा ही नहीं, इस रेस में उतरी दिग्गज कंपनी ‘एपल’ को भी तगड़ा झटका लगा है। 2024 में लॉन्च हुए एपल विजन प्रो की कीमत लगभग करीब 3 लाख रुपए थी, जो एक आम आदमी के बजट से कोसों दूर थी। विश्लेषकों का मानना है कि वीआर तकनीक को एक स्वतंत्र प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन और समय लेने वाला काम है। डिज्नी जैसी कंपनियों ने भी अपने ‘चीफ मेटावर्स ऑफिसर्स’ के पद खत्म कर दिए हैं। अब मेटा ने अपने फ्लैगशिप एप होराइजन वर्ल्ड्स का रुख वीआर से हटाकर मोबाइल फोन की ओर कर दिया है, जो इस प्रोजेक्ट की हार की औपचारिक स्वीकारोक्ति है। मेटा अपनी हार स्वीकार कर चुका है। पिछले साल एक कॉन्फ्रेंस में जुकरबर्ग ने ‘मेटावर्स’ शब्द का जिक्र सिर्फ दो बार किया, जबकि ‘एआई’ का नाम 23 बार लिया। कंपनी अब ‘सुपर इंटेलिजेंस’ एआई बनाने के लिए इस साल 10.81 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बना रही है। जुकरबर्ग का नया लक्ष्य ऐसा डिजिटल साथी बनाना है, जो इंसान जैसा बुद्धिमान हो। जिस भविष्य को जुकरबर्ग ने ‘मेटा’ नाम दिया था, वह अब एआई के डेटा सेंटर्स और कोडिंग की परतों के नीचे कहीं दब गया है।
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