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    कथावाचक प्रदीप मिश्रा पास से मिलने वाली एंट्री पर बोले:कुर्सी छीनने का डर रहता है, लेकिन जमीन कोई नहीं छीन सकता; आखिरी दिन कथा के समय में बदलाव

    14 hours ago

    जयपुर के मानसरोवर वीटी ग्राउंड में कथावाचक प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा चल रही है। पांचवें दिन की कथा में प्रदीप मिश्रा ने पास से मिलने वाली एंट्री पर अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि जिसे जहां जगह मिले, बैठ जाया करो। कथा पंडाल में क्या करने आए हो, कथा सुनने आए हो। कुर्सी पर बैठोगे तो भी वही मिलेगा, सोफे पर बैठोगे तो भी वही मिलेगा और जमीन पर बैठोगे तो भी वही मिलेगा। उन्होंने कहा- कुर्सी और जमीन में फर्क इतना है कि कुर्सी से गिरने का डर रहता है और जमीन से गिरने का डर नहीं रहता। कुर्सी छीनने का डर रहता है, लेकिन जमीन कोई नहीं छीन सकता। जैसे व्यापारी सोना-चांदी से ज्यादा जमीन खरीदते हैं, क्योंकि सोना चोरी हो सकता है लेकिन जमीन नहीं। उसी तरह कथा में भी जहां जगह मिले, वहीं बैठकर कथा सुनो। बता दें कि कथा सुनने प्रदेशभर से लोग आ रहे हैं। ऐसे में पांचवें दिन मंगलवार को भी पंडाल में सुबह से ही भीड़ रहीं। कथा के अंतिम दिन समय में भी बदलाव किया गया है। भीतर बदलने का प्रयास करो, बाहर का दिखावा नहीं प्रदीप मिश्रा ने कहा कि सारे संसार में आज एक होड़ लगी है। लंबे-लंबे बाल बढ़ा लो, बहुत सारा त्रिपुंड लगा लो, बहुत सारी माला पहन लो। बड़ी-बड़ी जटा बनाने के लिए आजकल नकली बाल भी मिलने लगे हैं। अगर आप भगवान शंकर की शिव महापुराण कथा को सुनेंगे, स्कंद पुराण को उठाकर देखेंगे तो आपको मिलेगा कि बाहर का जो स्वरूप है, वह भले बदले ना बदले, लेकिन अपने भीतर को बदलने का प्रयास करो। उन्होंने कहा कि तुम्हारे बाहर के स्वरूप से दुनिया रीझ सकती है, लेकिन परमात्मा को रिझाने के लिए बाहर का स्वरूप काम नहीं आता है। भगवान को रिझाने के लिए केवल भीतर का स्वरूप चाहिए, जिसमें परमात्मा के प्रति भक्ति और लगाव हो। आज व्यक्ति के पास धन-संपदा की कमी नहीं है, लेकिन मन की शांति की कमी जरूर है। नारी का सम्मान करो, तभी जीवन में ऊंचा स्थान मिलेगा प्रदीप मिश्रा ने कहा कि पराया धन और पराई स्त्री एक न एक दिन तुम्हें बर्बादी की सिर पर ले जाकर छोड़ देगी। अपने घर में जो नारी है, स्त्री है उसका सम्मान और आदर करो। जितने प्रेम से बाहर के लोगों से बात करते हो, उतने ही प्रेम से अपने घर में जो नारी बैठी है उससे भी बात करना सीखो। उन्होंने कहा कि भगवान शंकर ऐसे देवता हैं जो अपनी पत्नी को अपने से ऊंचा स्थान देते हैं। शिव महापुराण की कथा कहती है कि नारी ही एक ऐसी है जो राम, कृष्ण और संतों को जन्म देती है। अगर तुम नारी का सम्मान करोगे तो तुम्हारा भी स्थान ऊंचा होगा। अंतिम दिन सुबह 8 से 11 बजे तक होगी कथा प्रदीप मिश्रा ने कहा कि आज कथा का पांचवां दिन है। बुधवार को कथा में महाशिवरात्रि का प्रसंग होगा और इसके बाद गुरुवार को कथा का समापन होगा। समापन वाले दिन कथा के समय में बदलाव किया गया है और कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक होगी।
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