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    नई शिक्षा नीति-पेपर पैटर्न बदलाव से राजस्थान में बढ़ा रिजल्ट:सिलेबस अब स्टूडेंट्स के इंटरेस्ट का होने-डिजिटल आईक्यू भी कारण; पांच साल में परिणाम में 14% बढ़ोतरी

    17 hours ago

    राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की 10वीं कक्षा का रिजल्ट का प्रतिशत हर साल बढ़ रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस साल भी 1.17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अगर वर्ष 2020 के रिजल्ट से तुलना करें तो इसमें 13.59 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। कोरोना काल के बाद ऐसा कोई साल नहीं रहा, जब रिजल्ल्ट प्रतिशत नहीं बढ़ा हो। साल दर साल बढ़ रहे रिजल्ट के कारणों को जानने के लिए दैनिक भास्कर ने एक्सपर्ट टीचर से बात की। एक्सपट्‌र्स ने रिजल्ट में सुधार के कई कारण बताए हैं। इसमें मुख्य बड़ा कारण नई शिक्षा नीति लागू होना और पेपर पैटर्न में किए गए बदलाव हैं। नई शिक्षा नीति में सिलेबस कम करने के साथ कोर्स भी सरल किया गया। उसे बच्चों के इंटरेस्ट का बनाया गया, जिससे पढ़ाई का बोझ घटा और स्कोर करना आसान हुआ। ऐसे में रिजल्ट प्रतिशत बढ़ा। साथ ही पेपर में मल्टीपल चॉइस प्रश्नों की संख्या व स्टूडेंट्स का डिजिटल आईक्यू बढ़ना भी बताया है। इसके अलावा बोर्ड की ओर से जारी किए जाने वाले ब्ल्यू प्रिंट बेस्ड मॉडल पेपर के अनुसार- टीचर्स व स्टूडेंट्स की परीक्षा की तैयारी है। इसमें स्टूडेंट्स और टीचर्स उन्हीं चैप्टर पर फोकस कर रहे हैं, जो ज्यादा मार्क्स के हैं। कम मार्क्स वाले चैप्टर पर ज्यादा मेहनत नहीं करते। वहीं चित्र आधारित और पैसेज के सवालों की बढ़ी संख्या, सरल पैटर्न व रेग्यूलर एग्जाम से भी परिणाम में सुधार हुआ। एक्सपर्ट ने बताए ये कारण… नई शिक्षा नीति कोरोना काल के बाद नई शिक्षा नीति लागू की गई और इसमें कई बदलाव हुए। इसमें सिलेबस को कम करने के साथ कोर्स भी सरल किया गया है। उसे बच्चों के इंटरेस्ट का बनाया गया, जिससे पढ़ाई का बोझ घटा और स्कोर करना आसान हुआ। ऐसे में रिजल्ट प्रतिशत बढ़ा। ब्लूप्रिंट और मॉडल पेपर बोर्ड पहले से पेपर पैटर्न, मार्किंग स्कीम और सैंपल पेपर जारी करता रहा है, लेकिन कुछ वर्षों से ब्ल्यू प्रिंट बेस्ड मॉडल पेपर समय पर दे रहा है। इससे टीचर्स और स्टूडेंट्स को तैयारी करने का समय मिल रहा है। इस कारण भी रिजल्ट में सुधार हुआ। इससे बच्चों को तैयारी की स्पष्ट दिशा मिलती है। ऑब्जेक्टिव और MCQ आधारित सवाल ज्यादा पेपर में ऑब्जेक्टिव और बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQ) की संख्या बढ़ाई है। पहले चार-चार प्रश्न ही आते थे। अब इनकी संख्या 18 तक की गई है। ऐसे में स्कोर करना आसान हो गया है। इनमें अनुमान और एलिमिनेशन से भी अंक मिल जाते हैं। इसके अलावा फिल इन द ब्लैंक यानी खाली स्थान भरने वाले प्रश्न भी आने लगे हैं। डिजिटल आईक्यू में बढ़ोतरी बच्चों में कोरोनाकाल के बाद डिजिटल आईक्यू में भी बढ़ोतरी हुई है। पेरेंट्स भी जागरूक हुए हैं। स्कूल के अलावा बाहर पर्सनल या कोचिंग करवाई जाती है। बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ी है। रेग्यूलर टेस्ट और मार्गदर्शन स्कूलों ने अपने परिणाम में सुधार करने के लिए नियमित टेस्ट लेना शुरू किया है। वहीं स्टूडेंट्स पर फोकस भी बढ़ाया है, ताकि जिन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा तो उन पर विशेष ध्यान दे सकें। स्मार्ट क्लास और विजुअल लर्निंग वीडियो, एनीमेशन और प्रेजेंटेशन से कठिन सब्जेक्ट भी आसानी से समझ में आते हैं। कई स्कूलों में जिन बच्चों को कम समझ में आता है, उनके लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की जाती है। इससे परिणाम में सुधार हुआ। अब जानते हैं कि किस साल कितना रहा रिजल्ट…. राजस्थान बोर्ड - 10वीं के टॉप 5 जिले …………. पढे़ं ये खबर भी… पहली बार 12वीं से पहले आया 10वीं का रिजल्ट; कोटा में परिणाम देख डांस करने लगे स्टूडेंट, स्कूल बस ड्राइवर की बेटी जिला टॉपर बनीं राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (RBSE) की ओर से 10वीं का रिजल्ट जारी कर दिया गया। इस बार 94.23 प्रतिशत परिणाम रहा है। यह पिछले साल से 1.17 प्रतिशत अधिक है। पिछले साल 93.06 प्रतिशत परिणाम रहा था। लड़कों का 93.63 व लड़कियों का 94.90% रिजल्ट रहा है। मंगलवार दोपहर करीब एक बजे माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अजमेर स्थित ऑफिस से शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने रिजल्ट की घोषणा की। पूरी खबर पढे़ं
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